
मस्जिदों पर मेड-इन-चाइना की छाप और मुस्लिमों पर ड्रैगन का दबाव... चीन में क्यों मचा बवाल?
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चीन में मस्जिदों से गुबंद और मीनारें हटाई जा रही हैं, जबकि कई शहरों में इन्हें पूरी तरह से गिरा दिया गया. एक डेटा के मुताबिक, कुछ ही सालों के भीतर चीन से 16 हजार मस्जिदों के स्ट्रक्चर से छेड़छाड़ हुई. मौजूदा सरकार का मानना है कि देश की हर चीज पर चाइनीज-स्टाइल की छाप होनी चाहिए. इसे सिनिसाइजेशन कहते हैं यानी चीनीकरण करना.
फिलहाल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का काफी ध्यान इस्लाम के चीनीकरण पर है. वो लगातार इस धर्म से जुड़े प्रतीकों में बदलाव कर रही है ताकि वे चीन का ही हिस्सा लगने लगें. इसकी शुरुआत साल 2018 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक स्पीच से हुई. शी ने कहा कि वे चाहते हैं कि देश में रहने वाले हर मजहब के लोग चीन से खुद को जुड़ा महसूस करें, इसके लिए उन्हें चीनी प्रतीकों और तरीकों को अपनाना होगा. इसके बाद से बदलाव शुरू हो गया.
इस्लाम के चीनीकरण की कोशिश न्यूज मीडिया रेडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट इस बारे में बात करती है. उसके मुताबिक चीनी प्रशासन ने पांच सालों का प्रोग्राम बनाया, जिसमें इस्लाम का सिनिसाइजेशन हो जाना चाहिए. यानी इस धर्म को मानने वाले अपनी धार्मिक पहचान को छोड़ दें, जैसे लंबी दाढ़ी रखना, अलग कपड़े पहनना, या मस्जिदों में बार-बार जाना.
कितने मुसलमान हैं चीन में?
बता दें कि चीन में मुस्लिमों के दो समुदाय उइगर और हुई मुसलमान चीन के तीसरे और चौथे नंबर की एथनिक माइनोरिटी हैं. इसके अलावा भी इनके कई समुदाय हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 26 मिलियन है. हुई मुस्लिम इनमें सबसे पुराने हैं, जो लगभग 13 सालों से चीन में रहते आए. वे हाल तक अपनी मजहबी पहचान को अलग रखने में कामयाब रहे थे, लेकिन अब ये भी चपेट में हैं.
चीन ने इसके लिए बीजिंग, शंघाई, हुनान, युन्नान समेत 8 राज्यों से मुस्लिम प्रतिनिधि बुलाए और उनसे प्लान शेयर किया. मस्जिदों में कहा गया कि वो ज्यादा से ज्यादा चीनी बातों का प्रचार-प्रसार करें, जिससे मुसलमान अपनी मजहबी पहचान में उतने कट्टर न रहें.
सबसे ज्यादा फर्क मस्जिदों पर पड़ा उससे गुंबद और मीनारें हटाई जाने लगीं. साल 2014 में वहां लगभग 38 हजार मस्जिदें थीं. इन्हें गिराने या स्ट्रक्चर को चीनी बनाने का काम चलने लगा. फिलहाल कितनी मस्जिदें ढहाई या बदली जा चुकी हैं, इसका निश्चित डेटा नहीं. लेकिन ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) का मानना है कि 16 हजार मस्जिदों को नुकसान पहुंचाया गया. इसमें से साढ़े 8 हजार को पूरी तरह से गिरा दिया गया. ASPI ने ये डेटा सैटेलाइट के जरिए निकाला था.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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