
मरीज के दाएं के बजाए बाएं पैर का ऑपरेशन, डॉक्टर्स और हॉस्पिटल पर लगा 1 करोड़ 20 लाख का जुर्माना
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डॉक्टर्स ने 21 जून को मरीज के बाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया लेकिन अगले ही दिन रवि के परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा किया और शालीमार बाग थाने में अस्पताल और डॉक्टर राहुल काकरान और उनके जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) के दो डॉक्टर्स और संबंधित अस्पताल को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण और शिकायत निवारण आयोग ने एक करोड़ का मुआवजा देने का फैसला सुनाया है. इस फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट की भी मुहर लग चुकी है. डॉक्टरों ने दाएं पैर की बजाय बाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया था. अब डॉक्टर्स और हॉस्पिटल को एक करोड़ दस लाख रुपए मुआवजा देना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आदेश में कोई कमी या खामी नहीं है. इसमें अस्पताल 90 लाख रुपए और ऑपरेशन करने वाले व सुपरविजन करने वाले डॉक्टर दस-दस लाख रुपए भुगतान करेंगे.
डॉक्टर की अर्जी कोर्ट से खारिज
जस्टिस पामिदीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने दोषी ठहराए गए डॉक्टर राहुल काकरान की वो अर्जी भी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत के फैसले और पीड़ित रवि राय की अर्जी को चुनौती दी थी. शालीमार बाग में रहने वाले रवि राय 19 जून 2016 को सीढ़ियों से गिर गए थे और उनके दोनों पैरों की हड्डी टूट गई थी. इसके बाद मरीज को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, वहां डॉक्टर राहुल काकरान की अगुआई में डॉक्टरों की टीम ने उनका मुआइना किया. मरीज के दाएं पैर की हड्डी ज्यादा टूटी थी, जबकि बाएं पैर में हेयर लाइन फ्रैक्चर था.
डॉक्टरों ने 21 जून को मरीज के बाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया लेकिन अगले ही दिन रवि के परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा किया और शालीमार बाग थाने में अस्पताल और डॉक्टर राहुल काकरान और उनके जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी. इसके बाद परिजनों ने रवि को मैक्स अस्पताल में शिफ्ट कर दिया.
रवि ने अस्पताल को लीगल नोटिस भेजकर पांच करोड़ रुपए हर्जाना और मुआवजा 18 फीसद ब्याज के साथ अदा करने की मांग की. रवि के दाएं पैर की जगह बाएं पैर के ऑपरेशन की खबर मीडिया में आई, तो दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच करवाई और डॉक्टर्स की गलती पाते हुए उनके लाइसेंस रद्द कर दिए.

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