
मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका का ED ने किया विरोध, अब 20 अप्रैल को CBI की दलीलें सुनेगा कोर्ट
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कोर्ट ने 12 अप्रैल को कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को नोटिस जारी कर हफ्ते भर में अपना जवाब दाखिल करने को कहा था. सिसोदिया की ओर से चुनाव में प्रचार के लिए जमानत पाने के लिए याचिका लगाई गई है. इस पर सोमवार को दोनों जांच एजेंसियों ने अपने-अपने तर्क रखे और जमानत याचिका का विरोध किया. मामले में अब 20 अप्रैल को सीबीआई की दलीलें सुनी जाएंगी. इसके बाद कोर्ट जमानत याचिका पर फैसला देगा.
दिल्ली शराब नीति मामले में आरोपी मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई. इस दौरान जांच एजेंसी ईडी ने कोर्ट में याचिका का विरोध करते हुए कहा कि गंभीर मामलों में ट्रायल में देरी आरोपी के लिए जमानत का आधार नहीं हो सकता. दरअसल, आप नेता और दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग की है. इस पर सुनवाई जारी है.
कोर्ट ने 12 अप्रैल को कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को नोटिस जारी कर हफ्ते भर में अपना जवाब दाखिल करने को कहा था. सिसोदिया की ओर से चुनाव में प्रचार के लिए जमानत पाने के लिए याचिका लगाई गई है. इस पर सोमवार को दोनों जांच एजेंसियों ने अपने-अपने तर्क रखे और जमानत याचिका का विरोध किया. मामले में अब 20 अप्रैल को सीबीआई की दलीलें सुनी जाएंगी. इसके बाद कोर्ट जमानत याचिका पर फैसला देगा.
सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट से कहा कि अगर मनीष सिसोदिया के वकील सिर्फ ट्रायल में देरी को लेकर जमानत के लिए दबाव बना रहे हैं तो इस मुद्दे को लेकर उनको हलफनामा देना चाहिए. पहले भी हमने कोर्ट को बताया है कि बड़ी संख्या में आवेदन दायर किए गए थे. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि केस बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है. वे कह रहे हैं कि वे केवल देरी पर बहस करना चाहते हैं. मेरी आशंका है यदि आदेश केवल देरी के आधार पर पारित किया गया है, तो बाद में आदेश को चुनौती देने का आधार यह नहीं होना चाहिए कि ट्रायल कोर्ट ने योग्यता के आधार पर मामले पर विचार नहीं किया.
इस पर सिसोदिया के वकील ने कहा कि इन सभी योग्यताओं और दस्तावेजों, सबूतों आदि पर न केवल दोनों पक्षों द्वारा बहस की गई, न केवल सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुन: प्रस्तुत किया गया, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई पैराग्राफों में इसका निपटारा भी किया गया है. हमने तर्क दिया कि सिसोदिया अनिश्चित काल तक सलाखों के पीछे नहीं रह सकते और सुप्रीम कोर्ट ने उनके तर्क को स्वीकार कर लिया और कहा कि मुकदमे से पहले सजा नहीं दी जा सकती.
ईडी ने इस पर कहा कि सिसोदिया को हलफनामा दायर करना चाहिए कि वे देरी के पहलू पर दबाव डाल रहे हैं और योग्यता पर दबाव नहीं डाल रहे हैं. कोर्ट ने सिसोदिया के वकील से पूछा- क्या आप ऐसा हलफनामा दाखिल करने के लिए तैयार हैं?
ईडी ने अरविंद केजरीवाल के मामले में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया, जहां हाईकोर्ट ने मुकदमे में देरी के लिए केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया था. ईडी का कहना है कि मनीष सिसोदिया की जमानत पर फैसला करते समय इस पर विचार करना होगा. ईडी ने कहा कि यह एक और कारक है, जिसे ट्रायल शुरू होने में लगने वाले समय में योगदान के रूप में माना जाएगा. कई सह-अभियुक्तों ने यह सुनिश्चित किया है कि 207 सीआरपीसी चरण के दौरान 95 आवेदन दाखिल करने से यह सुनिश्चित होता रहे कि मुकदमे में देरी हो.

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