
मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में भी भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की जोड़ी हिट, बीजेपी को ऐसे दिलाई बंपर जीत
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भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की जोड़ी को महाराष्ट्र का जिम्मा भी सौंपा गया था. अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से भाजपा की किस्मत बदलने की पटकथा लिखने के लिए दोनों नेताओं ने पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र में डेरा डाला था.
वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की जोड़ी महाराष्ट्र के लिए भी हिट साबित हुई. सूबे में महायुति ने प्रचंड बहुमत हासिल किया. महायुति ने जहां 233 सीटों पर जीत का परचम फहराया, वहीं, बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, भगवा पार्टी ने 132 सीटें हासिल की हैं. बता दें कि पिछले साल भूपेंद्र यादव- अश्विनी वैष्णव की जोड़ी को मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के अभियान को लीड करने का काम सौंपा गया था, जहां उत्साहित कांग्रेस वापसी की उम्मीद कर रही थी, लेकिन बीजेपी ने 230 सदस्यीय विधानसभा में 163 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी.
भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव की जोड़ी को महाराष्ट्र का जिम्मा भी सौंपा गया था. अप्रैल-मई में लोकसभा चुनावों में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से भाजपा की किस्मत बदलने की पटकथा लिखने के लिए दोनों नेताओं ने पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र में डेरा डाला था.
रूठों को मनाया, कई जाति समूहों में पैठ बनाई
इस साल के लोकसभा चुनावों में भाजपा को भारी पराजय का सामना करना पड़ा, क्योंकि वह 2019 में जीती गई 23 सीटों के मुकाबले राज्य में केवल 9 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी. इसके बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कमर कसी और भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव को लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद, यानी जून में महाराष्ट्र चुनावों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किया गया. दोनों नेताओं ने पार्टी के भीतर असंतुष्ट वर्गों और विभिन्न छोटे जाति समूहों तक पैठ बनाई. क्योंकि बीजेपी, मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन से उत्पन्न चुनौती से जूझ रही थी.
भूपेंद्र यादव ने पहले भी निभाया जिम्मा
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के लिए महाराष्ट्र का कार्यभार पुराने मैदान में वापसी जैसा था, वे 2019 के विधानसभा चुनावों के लिए राज्य के प्रभारी थे, जब भाजपा ने 105 सीटें जीती थीं, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना 56 सीटें ही जीत सकी थी. हालांकि, ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भाजपा के साथ अपने गठबंधन से बाहर निकलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस के साथ सरकार बना ली, जो एनसीपी के दिग्गज और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार द्वारा बनाया गया गठबंधन था.

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