
मणिपुर के मुद्दे पर संसद में जोरदार हंगामा, विपक्ष PM के बयान पर अड़ा तो सरकार ने साफ किया रुख
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इस बार का सत्र मणिपुर के मुद्दे के आसपास ही केंद्रित है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर बहस को लेकर अड़ा हुआ है तो सत्ता पक्ष भी कह रहा है कि हम बहस को तैयार हैं. बाबजूद इसके सदन में कोई सार्थक चर्चा के बिना ही सदन को स्थगित कर दिया गया.
संसद का सत्र चल रहा हो और हंगामा न हो, ऐसा तो मुमकिन ही नहीं है. इन दिनों भी संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही की शुरुआत तो होती है, लेकिन बिना किसी सार्थक बहस के हर रोज सदन को स्थगित कर दिया जा रहा है. इसी वजह है हंगामा. सदन की कार्यवाही हर दिन हंगामे की भेंट चढ़ जाती है. इस मानसून सत्र की शुरुआत से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार कई बिल पेश करेगी. सार्थक बहस होगी और कोई नतीजा निकलेगा. कांग्रेस ने भी अपने मुद्दों की एक लिस्ट गिनाई थी. सरकार की ओर से UCC को लेकर चर्चा थी. लेकिन हकीकत और उम्मीदों में जमीन-आसमान का फर्क साफ नजर आ रहा है.
इस बार का सत्र मणिपुर के मुद्दे के आसपास ही केंद्रित है. विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर बहस को लेकर अड़ा हुआ है तो सत्ता पक्ष भी कह रहा है कि हम बहस को तैयार हैं. बाबजूद इसके सदन में कोई सार्थक चर्चा के बिना ही सदन को स्थगित कर दिया गया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश का साफ कहना है कि पहले प्रधानमंत्री मोदी इस मुद्दे को लेकर संसद में बयान दें उसके बाद इसपर चर्चा होगी.
'पहले पीएम बयान दें फिर होगी चर्चा'
उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, मानसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद की कार्यवाही नहीं हो सकी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकार INDIA दलों की मणिपुर में 3 मई के बाद की स्थिति पर प्रधानमंत्री के विस्तृत बयान की मांग नहीं मान रही है. INDIA की स्पष्ट मांग है - पहले प्रधानमंत्री सदन में बयान दें, उसके बाद इसपर चर्चा हो. INDIA की सभी पार्टियां सिर्फ मणिपुर ही नहीं वास्तव में पूरे देश के लोगों की भावनाओं को सामने रख रही हैं. कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री सदन में बयान देने से आखिर क्यों भाग रहे हैं?
'ये ट्विटर पर चर्चा की दुहाई देते हैं...'
तो वहीं इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि गृहमंत्री अमित शाह ने बहुत शालीनता के साथ विपक्ष द्वारा उठाई जा रही चर्चा की मांग को स्वीकार किया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने खुद विपक्ष से चर्चा को सुचारू रूप से चलाने के लिए बारंबार अनुरोध किया, लेकिन जिनका ऐजेंडा सिर्फ राजनीति हो, उन्हें राष्ट्र-नीति की बात कभी समझ नहीं आती है. जो विपक्ष टीवी और ट्विटर पर चर्चा की दुहाई देता रहता है, सदन में वही विपक्ष चर्चा के हर प्रयास विफल करने पर उतरा हुआ है. जनता देख रही है कि विपक्ष का असल सरोकार सत्य जानना नहीं, बल्कि राजनीतिक रोटियां सेंकना मात्र है.

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