
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बढ़ा भारत का कद, एंटी-करप्शन अलायंस GlobE में मिली जगह
AajTak
भारत को ग्लोब ई नेटवर्क की 15 सदस्यीय संचालन समिति में शामिल किया गया है. दुनियाभर के देशों को अपराध से निपटने से संबंधित सहयोग के लिए इस संस्था को बनाया गया था, जिसकी स्थापना के लिए भारत ने भी अपना समर्थन दिया था.
अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी मंच ग्लोब ई नेटवर्क ने भारत को अपनी 15 सदस्यीय समिति में शामिल किया है. चीन के बीजिंग में इसको लेकर वोटिंग हो रही थी, जहां भारत को चुना गया. ग्लोब ई नेटवर्क में 121 सदस्य देश और 219 सदस्य अधिकारी हैं, और इसका मकसद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना है.
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस समिति में भारत का शामिल होना देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इसके साथ ही भारत भी अपनी स्पेशलिटी और अनुभव के आधार पर वैश्विक संस्थाओं में अपना सहयोग देगा. भारत 2020 के जी20 सम्मेलन में उन देशों में शामिल था, जिसने इस तरह की संस्था बनाने के प्रस्ताव को समर्थन दिया था.
यह भी पढ़ें: तिरुपति के प्रसाद में मिलावट की CBI जांच की मांग तेज, कांग्रेस ने गृह मंत्रालय को लिखी चिट्ठी
यूएनजीए के स्पेशल सेशन में बनाई गई थी संस्था
इस संस्था को आधिकारिक तौर पर जून 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक स्पेशल सेशन में लॉन्च किया गया था. इस मंच से दुनियाभर के देशों को आपराधिक खुफिया जानकारी और अपराध से निपटने में रणनीतिक सहयोग किया जाता है.
ग्लोब ई नेटवर्क में क्या होगी भारत की भूमिका?

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है जो पहले वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला था. मचाडो ने यह पुरस्कार ट्रंप को सौंपा और ट्रंप ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार किया. यह घटना राजनीतिक जगत में खास तूल पकड़ रही है और दोनों नेताओं के बीच इस सम्मान के आदान-प्रदान ने चर्चा का विषय बना है. ट्रंप के लिए यह एक बड़ा सम्मान है जिसका उन्होंने खुले दिल से स्वागत किया.

अमेरिका ने ईरान पर हमले की चेतावनी के बाद अपने कदम फिलहाल वापस ले लिए हैं. हाल तक अमेरिका ईरान की हवाई और समुद्री घेराबंदी कर रहा था, लेकिन अब उसने मामले को डिप्लोमेसी के माध्यम से सुलझाने का अंतिम मौका दिया है. ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का फैसला किया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आर्मी को हमले के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की उनकी योजना का समर्थन न करने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है. इस बयान से यूरोपीय सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ गया है. अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच बातचीत जारी है, जबकि डेनमार्क और कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है.

पाकिस्तान एक बार फिर भारत की सीमा में ड्रोन भेज रहा है. जनवरी से जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन देखे गए हैं. सेना के मुताबिक ये आत्मघाती ड्रोन नहीं बल्कि निगरानी के लिए भेजे गए यूएवी हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान भारत की सुरक्षा तैयारियों और प्रतिक्रिया समय को परखने की कोशिश कर रहा है.







