
भारत में होने जा रही इस मीटिंग में शामिल होंगे चीन-पाकिस्तान, ऐन वक्त पर लिया फैसला
AajTak
भारत ने अगले महीने अप्रैल में होने जा रही शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री को आमंत्रित किया है. एससीओ के रक्षा मंत्रियों की अप्रैल में होने वाली बैठक के बाद संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक मई में गोवा में होने जा रही है.
भारत की मेजबानी में होने जा रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बैठक में पाकिस्तान और चीन ने शामिल होने का फैसला किया है. लेकिन दोनों देशों के प्रतिनिधि वर्चुअल तरीके से इस बैठक में शिरकत करेंगे.
भारत 29 मार्च को एससीओ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बैठक की मेजबानी करेगा. रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव एससीओ की सुरक्षा परिषदों के सचिवों की बैठक में हिस्सा लेंगे.
यह बैठक नई दिल्ली में होगी और इसमें शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी शामिल होंगे. इसके बाद एससीओ सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक होगी. इसके बाद चार से पांच मई को गोवा में एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. बता दें कि साल 2017 में एससीओ से जुड़ने के बाद भारत पहली बार इसकी मेजबानी कर रहा है. इससे पहले वाराणसी में हुई एससीओ के पर्यटन मंत्रियों की बैठक में भी पाकिस्तान ने शिरकत की थी.
क्या है एससीओ?
SCO की स्थापना 15 जून 2001 में की गई थी. इसकी स्थापना सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के मकसद से की गई थी. संगठन के सदस्यों में रूस, भारत, चीन, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं. एससीओ की बैठक हर साल आयोजित की जाती है. फिलहाल भारत एससीओ का अध्यक्ष है.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











