
भारत में अफीम खाने वाले तोतों के बाद यूके में ड्रग्स लेते दिखे ये पक्षी, लोगों से कर रहे लूटपाट
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यूके में कुछ पक्षियों को ड्रग्स की लत लग गई है. यहां के समुद्री तट पर पाए जाने वाले सीगल आजकल ड्रग्स लेने लगे हैं. ये पक्षी लोगों से हाथ से ड्रग्स छीनकर ले जा रहे हैं और इसे लेने के चलते ही उनके स्वभाव में अजीब सा बदलाव देखने को मिल रहा है.
भारत में हाल ही में अफीम खाने वाले तोते काफी चर्चा में रहे. ये तोते मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम में की जाने वाली अफीम की खेती चट कर जा रहे थे. जिसके बाद अब यूके में पंछियों को लेकर एक अलग ही नजारा देखने को मिला है. एक जानकारी के मुताबिक यहां के समुद्री तट पर पाए जाने वाले सीगल आजकल ड्रग्स लेने लगे हैं. यूं तो सीगल हमेशा से ही खाना छीनकर खाने के लिए जाने जाते हैं लेकिन ड्रग्स छीनने की इनकी नई आदत ने प्रशासन की नाक में दम कर दिया है. दरअसल, इस पक्षियों को स्पाइस नाम के ड्रग की आदत लग गई है और वे लोगों से ये ड्रग छीनकर ले जा रहे हैं. इस ड्रग को लेने से इन सीगल के बिहेवियर में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. ड्रग छीनने के लिए पीछा करते हैं सीगल
स्पाइस ड्रग के आदी रह चुके हेस्टिंग के रहने वाले केविन रोबर्टसन ने बताया कि जब के ड्रग्स लेते थे तो किस तरह सीगल उनका पीछा करने लगे था. ये सीगल स्पाइस को छीनने के लिए किसी भी हद तक चले जाते थे. इस ड्रग के चलते लोगों को सीगल के स्वभाव में बदलाव और उनकी अजीबोगरीब हरकतें देखने को मिल रही हैं. फिलहाल प्रशासन इस मुसीबस से छुटकारा पाने की कोशिश में जुटा है.
क्या है स्पाइस ड्रग?
न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के अनुसार United States Drug Enforcement Administration (DEA) की मानें तो K2 के नाम से पहचाने जाने वाला स्पाइस एक सिंथेटिक मेरिजुआना है. इसे टीएचसी जैसा असर दिखाने के लिए तैयार किया गया है. ये टीएचसी कैनाबिस का ही कंपोनेंट है. डीईए की वेबसाइट पर स्पाइस ड्रग के खतरनाक प्रभाव को लेकर चेतावनी भी दी गई हैं. इस ड्रग को लेने वाले सीगल जिस तरह की अजीब हरकतें कर रहे हैं उन्हें देखकर लोग उन्हें 'Psycho Gulls' कहने लगे हैं.
तेजी से बढ़ाता है हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर
DEA के मुताबिक, चाहे इस ड्रग को सूंघा जाए या निगला जाए, दोनों ही स्थिति में ये हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है. इसके कई बार एनजाइटी या दौरे पड़ने की हालत हो जाती है. न्यू यॉर्क स्टेट ऑफिस ऑफ एडिक्शन सर्विसेज एंड सपोर्ट्स के अनुसार, सिंथेटिक वीड साधारण वीड से अलग है, क्योंकि यह एक लैब में उगाया जाता है.

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