
भारत के H1B वीजा टैलेंट पर कनाडाई PM की नजर, टेक पेशेवरों के लिए खोलेंगे दरवाजे?
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प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि कनाडा अत्यधिक कुशल विदेशी श्रमिकों को आकर्षित करने के लिए एक नई योजना लाने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका द्वारा H-1B वीज़ा पर $100,000 का भारी-भरकम शुल्क लगाने के बाद पैदा हुई उथल-पुथल को कनाडा एक अवसर के रूप में देख रहा है. कनाडा का ये कदम भारतीय और चीनी पेशेवरों को प्रभावित करेगा.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका में H-1B वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी के बाद हाइली स्किल्ड वर्कर को आकर्षित करने के लिए एक नई योजना पेश करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि कनाडा इस उथल-पुथल को टैलेंट, इनोवेशन और देश के भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक अवसर के तौर पर देख रहा है. उनकी ये योजना आगामी हफ्तों में वाशिंगटन के वीजा प्रतिबंध के मुकाबले एक प्रतिस्पर्धी जवाब के रूप में सामने आएगी.
प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कनाडा इस अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, 'अमेरिका में अब लोगों को आसानी से H-1B वीजा नहीं मिलेगा. ये स्किल्ड लोग हैं और कनाडा के लिए एक अवसर हैं और हम जल्द ही एक प्रस्ताव लाएंगे'
'कनाडा के लिए है मौका'
उन्होंने जोर देकर कहा कि ये केवल संख्याओं का मुद्दा नहीं, बल्कि टैलेंट, इनोवेशन और कनाडा की भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है. उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि उनकी ये योजना टेक पेशेवरों पर केंद्रित होगी, जिसमें अस्थायी वर्क परमिट और स्थायी निवास के विकल्प शामिल हो सकते हैं.
ट्रंप का वीजा टैरिफ
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने 19 सितंबर 2025 को एक कार्यकारी आदेश जारी कर एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने की घोषणा की जो 21 सितंबर से प्रभावी हो गया है. एच-1बी वीजा विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़ी विशेषज्ञ भूमिकाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसका अधिकांश लाभ भारत (71%) और चीन (11.7%) के पेशेवरों को मिलता है.

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