
भाई को लेकर नमाज पढ़ने गया और..., पेशावर मस्जिद ब्लास्ट के चश्मदीदों ने बताई खौफनाक आपबीती
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पाकिस्तान के पेशावर में दोपहर की नमाज के समय मस्जिद में बम ब्लास्ट हो गया है, जिसमें अभी तक 63 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. इस हादसे में 150 से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है.
पाकिस्तान के पेशावर में दोपहर की नमाज के लिए लोग जब मस्जिद में आ रहे होंगे तो उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि वह सिर्फ चंद मिनटों के ही मेहमान हैं. मस्जिद के इमाम ने नमाज पढ़ाना शुरू किया ही था कि पहली लाइन में खड़े सुसाइड अटैकर ने बम ब्लास्ट कर दिया. ब्लास्ट इतना भयानक था कि मस्जिद की छत और दीवार तक गिर गई. अभी तक इस हादसे में 63 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. वहीं, 150 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
मस्जिद में हुए ब्लास्ट में जिन लोगों की जान बची, वह सब उस खौफनाक समय के बारे में सोचकर भी सहम जाते हैं. इन्हीं में पाकिस्तान पुलिस के एक इंस्पेक्टर शफीक भी शामिल हैं. शफीक ने इस हादसे में अपने चचेरे भाई इरफानउल्लाह को खो दिया है, जो खुद भी एक पुलिसकर्मी थे.
कैसा था हादसे के बाद का खौफनाक मंजर?
अस्पताल में भर्ती शफीक ने पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार से ब्लास्ट के बाद का हाल बताया. इंस्पेक्टर शफीक ने बताया कि धमाका होते ही उनकी आंखें बंद हो गईं. कुछ सेकेंड बाद जब आंखें खुलीं तो सामने सिर्फ धुआं ही धुआं नजर आ रहा था. वहीं, उनके पास भाई इरफानउल्लाह का शव मलबे में दबा हुआ पड़ा था.
शफीक ने आगे बताया कि उनके भाई इरफानउल्लाह की तीन बेटियां और दो बेटे हैं. सभी बच्चों की उम्र 11 से 4 साल के बीच में है. इरफान की तैनाती सरबंद पुलिस थाना में थी और वह हादसे से पहले शफीक के साथ एक जरूरी मीटिंग से लौट रहे थे. नमाज का समय हुआ तो दोनों नमाज के लिए पास की मस्जिद में चले गए.
इरफानउल्लाह उन 63 लोगों में से एक हैं, जिनकी इस हादसे में जान चली गई. इरफान के भाई शफीक समेत 150 से ज्यादा घायल अस्पताल में मौत और जिंदगी के बीच जंग लड़ रहे हैं.

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