
ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग पर हमले को लेकर आया विदेश मंत्री जयशंकर का सख्त बयान
AajTak
ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के बाहर खालिस्तान समर्थकों के हंगामे को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टिप्पणी की है. उन्होंने कहा है कि मिशन और राजनयिकों की सुरक्षा देशों का कर्तव्य होता है जिसे ब्रिटेन ने नहीं निभाया है. उन्होंने कहा कि कुछ देश अपनी सुरक्षा और दूसरों की सुरक्षा में अंतर करते हैं, यह स्वीकार्य नहीं है.
ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग के परिसर में खालिस्तान समर्थकों द्वारा भारतीय झंडे के अपमान और उच्चायोग में तोड़फोड़ को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि दूतावास या उच्चायोग के परिसर का सम्मान और राजनयिक को सुरक्षा प्रदान करना देशों का कर्तव्य होता है और ब्रिटेन ने अपने कर्तव्य को नहीं निभाया है.
बेंगलुरु में BJYM युवा संवाद कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, 'ब्रिटेन ने अपने दायित्वों को पूरा नहीं किया है. दूतावास या उच्चायोग के परिसर का सम्मान सुनिश्चित और राजनयिकों को अपना काम करने के लिए सुरक्षा प्रदान करना देशों का दायित्व है. इन दायित्वों को पूरा नहीं किया गया. इस पर ब्रिटिश सरकार के साथ हमारी बातचीत हुई है.'
उन्होंने आगे कहा, 'कई देशों की अपनी सुरक्षा के बारे में अलग राय है और दूसरे लोगों की सुरक्षा के बारे में अलग राय है. हम इस अंतर वाली स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे.'
अमृतपाल सिंह मामले को लेकर लंदन में हंगामा
पंजाब के खालिस्तान समर्थक संगठन 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह पर पुलिस का कार्रवाई के विरोध में लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने बीते दिनों काफी हंगामा किया है. 19 मार्च को खालिस्तान समर्थकों ने उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन के दौरान भारतीय झंडे को मिशन से उतारकर वहां खालिस्तान का झंडा लगा दिया.
हालांकि, बाद में भारतीय अधिकारियों ने वहां पहले से भी ज्यादा बड़ा तिरंगा लहरा दिया. प्रदर्शनकारियों ने उच्चायोग में तोड़फोड़ की और भारत विरोधी नारे लगाए.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?









