
बॉर्डर पर मार के बाद अब कारोबार पर चोट... PAK से मिले हर जख्म का यूं बदला ले रहा अफगानिस्तान
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अफगानिस्तान के साथ सीमा बंद करना पाकिस्तान के लिए गले की फांस बन गया है. उसका सीमेंट उद्योग, दवा निर्यात और फल-सब्जियों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कोयले के दाम आसमान छू रहे हैं, फल व सब्जी मंडियों में माल सड़ रहा है.
पाकिस्तान के डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने अफगानिस्तान को चेतावनी दी थी कि 'खून और कारोबार साथ-साथ नहीं चल सकते'. अब यही बात पाकिस्तान पर भारी पड़ रही है. अफगानिस्तान के साथ 48 दिनों से सीमा बंद होने के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है, जबकि तालिबान ने फुर्ती दिखाते हुए अपना व्यापार ईरान, भारत, मध्य एशिया और तुर्की की ओर मोड़ लिया है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ इसे 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकवादियों को रोकने का सबसे अच्छा तरीका' बता रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि बॉर्डर बंद होने की कीमत आम व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, मजदूर और उपभोक्ता चुका रहे हैं. जनरल चौधरी की दी गई धमकी अब पाकिस्तान के गले की फांस बन चुकी है.
सीमेंट और फार्मा उद्योग बुरी तरह प्रभावित
'द डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक अफगान कोयले का आयात बंद होने से पाकिस्तानी सीमेंट कंपनियों को दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और मोजाम्बिक से महंगा कोयला खरीदना पड़ रहा है. स्थानीय कोयले की कीमत 30-32 हजार से बढ़कर 42-45 हजार रुपये प्रति टन हो गई. पाकिस्तान हर साल अफगानिस्तान को करीब 187 मिलियन डॉलर की दवाएं निर्यात करता था; अब पूरा स्टॉक फैक्टरियों में फंसा है. कई दवाएं पाकिस्तान में रजिस्टर्ड ही नहीं हैं, इसलिए लोकल मार्केट में भी नहीं बिक सकतीं.
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फल और सब्जियां सड़ रहीं, कीमतें दोगुनी

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