
'बॉर्डर पर तैनात था तो दुश्मन कुछ नहीं बिगाड़ पाए, पटवारी बनते ही बेटे को माफिया ने मार डाला...', कहते हुए बिलख पड़े पिता
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Patwari Murder Case: पटवारी के बिलखते पिता ने कहा, देखिए कितनी बड़ी विडंबना है कि प्रसन्न सिंह 16 साल तक सरहद में देश की सेवा के लिए तैनात रहे और दुश्मन उनका बाल बांका नहीं कर पाए, लेकिन अपने देश में ही रेत माफिया ने उनकी जान ले ली.
मध्य प्रदेश में रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं. शहडोल जिले के ब्यौहारी में गश्त कर रहे ईमानदार पटवारी की रेत माफियाओं ने टैक्टर से कुचल कर हत्या कर दी. पटवारी ने प्रशासन से खतरे का संदेह पहले ही जताया था. बावजूद इसके सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए थे. इस हादसे के बाद से पटवारी प्रसन्न सिंह के परिजन सदमे में है और गांव में मातम पसरा हुआ है.
रीवा जिले के बरौ गांव में जन्मे प्रसन्न सिंह 16 साल तक भारतीय सेना में रहकर देश की सरहद पर रखवाली की थी. साल 2017 में रिटायर्ड होने के बाद बाद राजस्व विभाग में पटवारी बने. 2018 में अनूपपुर के बाद शहडोल में तैनात होकर सोन नदी के तट पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए मुस्तैद थे.
पुलिस फोर्स मुहैया नहीं कराई गई
बीती रात SDM के आदेश का अमल करते हुए रेत को माफियाओं से बचाने के लिए दबिश दी. जहां प्रसन्न सिंह पर हमला हो गया. माफिया ने टैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी. प्रसन्न के साथ केवल उनके 4 सहयोगी और ड्राइवर था. जबकि पुलिस फोर्स मुहैया नहीं कराई गई थी. लेकिन फर्ज और ईमानदारी से ड्यूटी निभाने के लिए खतरा होने के बावजूद भी प्रसन्न जोखिम में चले गए थे.
थाने से चंद दूरी पर अवैध उत्खनन
पुलिस थाने से चंद दूरी पर इस इलाके में लंबे अरसे से अवैध उत्खनन हो रहा था. इस इलाके में पहले भी माफियाओं ने हमले किये थे. 2 दिन पहले ही प्रशासन ने छापामार कर माफियाओं कब्जे से मशीन और ट्रक जप्त किए थे. खतरे को जानते हुए भी प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे. नतीजन प्रसन्न सिंह की जान चली गई.

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