
'बैटल कमांडर', 'IED मास्टर' और करोड़ों का इनाम... हिडमा के खात्मे के बाद बचे हैं ये टॉप 5 कुख्यात नक्सली!
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हिडमा और मटुरे जैसे दुर्दांत नक्सल कमांडरों के सफाए के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल मोर्चे पर सबसे बड़ा दबदबा कायम किया है. लेकिन दंडकारण्य के जंगलों में अब भी ऐसे खूंखार चेहरे बचे हैं, जो बस्तर से झारखंड तक हिंसा की जड़ बने हुए हैं. गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने की डेडलाइन तय की है.
नक्सल विरोधी ऑपरेशन के दौरान माडवी हिडमा सहित छह माओवादियों के मारे जाने के बाद आंध्र प्रदेश में 50 CPI कैडर पकड़े गए हैं. 18 नवंबर को अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हुए एनकाउंटर के अगले ही दिन सुरक्षा बलों ने कार्रवाई तेज कर दी. पांच जिलों में एक कोऑर्डिनेटेड इंटेलिजेंस ऑपरेशन लॉन्च के दौरान ये सफलता मिली है.
ADGP इंटेलिजेंस महेश चंद्र लड्ढा ने खुलासा किया कि माधवी हिडमा के खात्मे के तुरंत बाद सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और बस्तर से कई माओवादी भागकर आंध्र प्रदेश पहुंच गए. इनमें स्पेशल जोनल कमेटी के मेंबर, डिविजनल कमेटी मेंबर, एरिया कमेटी मेंबर और दक्षिण बस्तर-दंडकारण्य में सक्रिय रेगुलर कैडर शामिल थे.
इसकी जानकारी मिलते ही स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन ब्रांच, डिस्ट्रिक्ट पुलिस यूनिट और विजयवाड़ा कमिश्नरेट की संयुक्त टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी. उनकी तलाशी में माओवादियों के साथ 39 हथियार, 302 राउंड एम्युनिशन, डेटोनेटर, कॉर्डटेक्स वायर, कम्युनिकेशन डिवाइस और 13 लाख रुपए कैश बरामद हुए.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से माओवादी हिंसा खत्म करने का लक्ष्य दिया है. उन्होंने खुद माडवी हिडमा के खात्मे के लिए 30 नवंबर की डेडलाइन तय की थी, जिसे सुरक्षा बलों ने 12 दिन पहले ही पूरा कर दिया. अब सवाल है कि बचे हुए वो खतरनाक चेहरे कौन हैं, जो जंगलों के अंदर अभी भी मौत का नेटवर्क चला रहे हैं?
आइए उन खूंखार नक्सली कमांडरों के बारे में जानते हैं...
1. देवा बरसे: नक्सलियों का नया 'बैटल कमांडर'

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