
बिहार में NDA की सत्ता-वापसी के लिए कितना कारगर होंगी नीतीश कुमार की ताबड़तोड़ घोषणाएं?
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू कर दी है. तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री की घोषणा को अपनी योजनाओं की नकल बता रहे हैं. नीतीश कुमार हर तबके के वोटर को साधने में जुटे हुए हैं, लेकिन फायदा तो तभी होगा जब लोग महज चुनावी घोषणाएं न समझ लें.
नीतीश कुमार ने हाल फिलहाल ढेरों लोक लुभावन घोषणाएं की हैं. बिहार विधानसभा चुनाव काफी नजदीक महसूस हो रहे होंगे, और अब तो बार बार ये भी कह चुके हैं कि कहीं नहीं जाएंगे. जब पाला बदलने का स्कोप न हो तो जनता का ही सहारा होता है - यही वजह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के हर तबके को वक्त रहते साध लेने की कोशिश में जुटे हैं.
शिक्षकों की भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू किया जाना नीतीश कुमार की लेटेस्ट घोषणा है. और, तेजस्वी यादव ने भी खुशी जताई है, लेकिन लगे हाथ ये तोहमत भी मढ़ दी है कि सब कॉपी-पेस्ट टाइप मामला ही है. ऐसी मांग तो प्रशांत किशोर और दूसरे नेताओं की तरफ से भी की जा रही थी, और पटना के गांधी मैदान में आंदोलन कर रहे छात्र तो नारेबाजी ही कर रहे थे - 'वोट दे बिहारी और नौकरी ले बाहरी, अब ये नहीं चलेगा.'
चाहे जिस दबाव में नीतीश कुमार ने डोमिसाइल वाली घोषणा की हो, लोगों के लिए फायदे की बात तो है ही. और ये घोषणा भी ऐसी है कि सत्ता में चाहे जो भी राजनीतिक दल आए, बदलने की हिम्मत तो शायद ही हो पाए. शराबबंदी का मामला ही ऐसा है, जिसे लेकर हर कोई खामोश नजर आता है, सिवा जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर के.
बीते कुछ दिनों की बात करें तो डोमिसाइल नीति से पहले नौकरी और रोजगार के अलावा भी नीतीश कुमार ने अलग अलग फील्ड के लिए बहुत सारी घोषणाएं की हैं - और ऐसा लगता है जैसे वो हर वोट बैंक को उनकी मुंहमांगी मुराद पूरी कर साध लेने की कोशिश कर रहे हों.
बिहार में शिक्षक भर्ती में डोमिसाइल नीति
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षकों की भर्ती के मामले में डोमिसाइल नीति लागू करने का फैसला किया है, जिसके बाद भर्ती में बिहार के निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी. ये व्यवस्था TRE-4 यानी टीचर रिक्रूटमेंट एग्जाम - 4 से लागू होगी. ये पॉलिसी लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश भी दे दिया गया है.

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