
बिहार में CM नीतीश के काफिले के लिए रोकी गई एंबुलेंस पर सुलगी सियासत, BJP ने साधा निशाना, बीमार बच्चे के साथ फंसा रहा परिवार
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बिहार के नालंदा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले के एंबुलेंस रोके जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है. इस मामले को लेकर भाजपा ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. भाजपा ने कहा कि ये संवेदनहीनता है कि एक बीमार बच्चे के साथ उसका परिवार ट्रैफिक में फंसा रहा.
बिहार में एक बार फिर एंबुलेंस को रोक दिया गया, क्योंकि मुख्यमंत्री का काफिला गुजरना था. नीतीश कुमार अपने गृह जनपद नालंदा पहुंचे थे. फातुहा के पास उनका काफिला गुजरने से पहले ट्रैफिक रोक दिया गया. उसी ट्रैफिक में एक एंबुलेंस भी रोक दी गई. इसमें एक मां अपने बच्चे का इलाज कराने के लिए पटना ले जा रही थी. बीमार बच्चे को गोद में लिए बेबस मां बार-बार पुलिस वालों से गुहार लगाती रही कि साहेब उसे जाने दीजिए, लेकिन पुलिसवालों का दिल नहीं पसीजा. अब बीजेपी एंबुलेंस रोके जाने को लेकर नीतीश पर हमलावर है.
बिहार में नालंदा नीतीश कुमार का गृह जिला है. यहां फातुहा के पास नीतीश का काफिला गुजरने से पहले ट्रैफिक रोक दिया गया. वहां कर्फ्यू जैसा लग गया. ट्रैफिक में एंबुलेंस भी रोक दी गई, जिसमें एक मां अपने बच्चे का इलाज कराने के लिए पटना ले जा रही थी. एंबुलेंस वाले ने कहा कि उसे काफी देर से रोक रखा है.
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पहले भी काफिले के लिए रोकी जा चुकी है एंबुलेंस
मुख्यमंत्री का काफिला बिना किसी असुविधा के निकले, ये इंतजाम करना पुलिस का काम है, लेकिन इसके लिए एंबुलेंस को भी रोक दिया गया. ऐसा पहले भी हुआ है. बिहार में इसी साल जनवरी की बात है. मुख्यमंत्री एक यात्रा पर निकले थे. देर ना हो जाए, इसलिए दावा है कि ट्रेन तक को पंद्रह मिनट रुकवाकर क्रॉसिंग से नीतीश कुमार के काफिले को निकलवाया गया. सवाल पर सीएम ने कहा था कि अरे हमको पता नहीं था.
पिछले महीने पटना में मरीन ड्राइव इलाके में नीतीश का काफिला निकलना था, यहां भी एंबुलेंस रोक दी गई थी. अब नालंदा में वही हुआ है. एंबुलेंस के अंदर मरीज थे. परेशान होते परिजन थे, लेकिन एक भी पुलिसकर्मी को नहीं लगा कि एंबुलेंस को तो ना रोका जाए.

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