
बिहार चुनाव से ठीक पहले शत्रुघ्न सिन्हा को याद आई PM मोदी की दोस्ती, लिखा- 'एक बार का दोस्त, हमेशा के लिए दोस्त...'
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टीएमसी नेता शत्रुघ्र सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर बधाई देते हुए अपना दोस्त बताया है. इसे लेकर सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि बिहार चुनाव सिर पर है. शत्रुघ्र सिन्हा ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज बीजेपी से किया था, लेकिन छह साल पहले पार्टी को छोड़ गए हैं...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर देशभर के नेता उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं. अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दोस्ती को याद किया. शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया में साझा करते हुए लिखा, 'एक बार का दोस्त, हमेशा के लिए दोस्त.'
प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन पर शत्रुघ्न सिन्हा को दोस्ती की याद दिलाने वाले मैसेज के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी के चलते ही शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी के साथ अपना 27 साल पुराना नाता तोड़कर 2019 में अलग हो गए थे. कांग्रेस से होते हुए अब वह टीएमसी से सांसद हैं.
अब छह साल बाद फिर प्रधानमंत्री मोदी के साथ शत्रुघ्न सिन्हा को अपनी दोस्ती याद आ रही है. साथ ही वो यह भी कह रहे हैं कि एक बार का दोस्त हमेशा के लिए दोस्त होता है. बिहार चुनाव से ठीक पहले शत्रुघ्न को प्रधानमंत्री मोदी की दोस्ती याद आने के सियासी मायने क्या हैं?
पीएम मोदी के साथ शत्रुघ्न सिन्हा के रिश्ते
शत्रुघ्न सिन्हा और प्रधानमंत्री मोदी दोनों ने ही अपनी सियासी पारी का आगाज़ बीजेपी से किया है. शत्रुघ्न और मोदी दोनों ही लालकृष्ण आडवाणी खेमे के नेता माने जाते हैं. बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखने वाले बड़े नामों में शत्रुघ्न सिन्हा एक हैं, और वो न सिर्फ सियासत में पैठ बनाई बल्कि कई बड़े सितारों की तरह फिर राजनीति छोड़कर सिनेमा में वापस नहीं गए.
बीजेपी में बड़े नेता के तौर पर भी देखे गए और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बने. लेकिन, शत्रुघ्न सिन्हा के रिश्ते प्रधानमंत्री मोदी से तब बिगड़ने शुरू हुए, जब 2014 के लिए बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन करना था. 2013 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में राज्यों के चुनाव होने वाले थे, उसी के साथ बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री पद का चेहरा तय करने की कवायद हो रही थी.

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