
बिहार के लोगों को बिजली बिल पर झटका! 24.10% की बढ़ोतरी का हुआ फैसला
AajTak
बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली दर में बढ़ोतरी की घोषणा की है. प्रदेश के बिजली शुल्क में 24.10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
बिहार के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली दर में बढ़ोतरी की घोषणा की है. प्रदेश के बिजली शुल्क में 24.10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के आधार पर अब प्रति यूनिट बिजली दर तय की जाएगी.
बिजली कंपनियों ने 40 फीसदी तक बिजली दर वृद्धि और साथ ही फिक्सड चार्ज भी दो गुना से अधिक करने का प्रस्ताव दिया था. ये प्रस्ताव कंपनियों ने बिजली आपूर्ति खर्च में हुई वृद्धि को आधार बनाते हुए दिया था. हालांकि विद्युत नियामक आयोग ने कंपनियों के प्रस्ताव को नहीं माना. हालांकि इसके बाद भी बिहार की जनता को अब बिजली बिल में अपनी जेब और ढीली करनी होगी.
बिजली दरों के स्लैब दो हुए
बिहार विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष शिशिर कुमार सिंह ने गुरुवार को बताया कि प्रति यूनिट बिजली दरों में बढ़ोतरी के साथ ही इलेक्ट्रिसिटी बिल के फिक्स्ड चार्ज में भी बढ़ोतरी की गई है. सिंह ने कहा कि फिक्स्ड चार्ज में दो गुने से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. साथ ही बिजली दरों के स्लैब को तीन से कम कर अब दो कर दिया गया है.
अभी बिहार में बिजली की दर क्या है?
बिहार में अभी ग्रामीण क्षेत्र के घरेलू उपभोक्ताओं को 50 यूनिट बिजली खपत के लिए 6.10 रुपये प्रति यूनिट देना होता है. वहीं इससे ज्यादा खपत होने पर 6.40 रुपये प्रति यूनिट भुगतान करना होता है. वहीं शहरी क्षेत्रों में 100 यूनिट खपत तक 6.10 रुपये प्रति यूनिट चार्ज है, जबकि इससे ज्यादा बिजली खपत पर 6.95 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होता है. हालांकि बिजली की दरों में बढ़ोतरी होने के बाद अब उपभोक्ताओं को कितने रुपये प्रति यूनिट भुगतान करना होगा, इसकी जानकारी नहीं है क्योंकि अभी सरकार इस पर सब्सिडी की घोषणा भी करेगी.

दिल्ली में कांग्रेस द्वारा मनरेगा बचाओ आंदोलन तेज़ी से जारी है. 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सामने बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एकत्रित हुए हैं. यह विरोध प्रदर्शन मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ किया जा रहा है. मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को रोजगार देने वाली इस योजना में बदलावों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते ने क्षेत्रीय आर्थिक समीकरणों में बड़ा बदलाव ला दिया है. इस ऐतिहासिक डील से पाकिस्तान को निर्यात के क्षेत्र में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इस डील से पैदा हुए संभावित नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए यूरोपीय अधिकारियों से संपर्क किया है. यह समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मियां मुसलमानों को लेकर फिर से विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर राज्य के मियां मुसलमानों को परेशान करना हो तो वह रात दो बजे तक जाकर भी परेशान कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने मियां मुसलमानों को पांच रुपए देने की बजाय चार रुपए देने की बात कह कर विवादों को जन्म दिया है. इसपर पर अब विपक्ष हमलावर है.

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.





