
बिल गेट्स का प्लानः धरती से 19KM ऊपर बिछाना चाहते है चॉक की परत, जानिए वजह...
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बिल गेट्स चाहते हैं कि धरती के स्ट्रैटोस्फेयर में लाखों टन चॉक (Chalk) के धूल का स्प्रे किया जाए. यानी धरती की सतह से करीब 19.36 किलोमीटर ऊपर चॉक की परत. इससे सूरज की रोशनी धरती पर कम आएगी, धरती पर हो रही ग्लोबल वार्मिंग में कमी आएगी. इसे लेकर एक बड़े प्रयोग की तैयारी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट कर रहे हैं. इसके लिए बिल गेट्स ने यूनिवर्सिटी को 3 मिलियन डॉलर्स यानी 21.77 करोड़ रुपए दिए हैं.
अरबपति बिल गेट्स चाहते हैं कि धरती के स्ट्रैटोस्फेयर में लाखों टन चॉक (Chalk) के धूल का स्प्रे किया जाए. यानी धरती की सतह से करीब 19.36 किलोमीटर ऊपर चॉक की परत. इससे सूरज की रोशनी धरती पर कम आएगी, धरती पर हो रही ग्लोबल वॉर्मिंग में कमी आएगी. इसे लेकर एक बड़े प्रयोग की तैयारी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट कर रहे हैं. इसके लिए बिल गेट्स ने यूनिवर्सिटी को 3 मिलियन डॉलर्स यानी 21.77 करोड़ रुपए दिए हैं. (फोटोःगेटी) डेली मेल वेबसाइट में प्रकाशित खबर के अनुसार इस थ्योरी को लेकर एक परीक्षण भी किया जाने वाला है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट एक बड़े से गुब्बारे में 2 किलोग्राम चॉक की धूल स्वीडन के किरूना कस्बे के ऊपर छोड़ेंगे. ये धूल धरती की सतह से 19.36 किलोमीटर ऊपर स्ट्रैटोस्फेयर में छोड़ा जाएगा. इससे ये पता किया जाएगा कि इतने चॉक से सूरज की कितनी रोशनी परावर्तित यानी रिफलेक्ट होती है. कितनी रोशनी धरती तक नहीं पहुंचती. इससे धरती कितनी ठंडी होगी. (फोटोःहगहंट) हालांकि, इस आइडिया को दुनियाभर के साइंटिस्ट बुरा भला कह रहे हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे धरती के मौसम में भयावह परिवर्तन होगा. इस तरह की जियो-इंजीनियरिंग किसी भी तरह से धरती के लिए सही नहीं है. लेकिन बिल गेट्स की तरह कई अन्य दानदाताओं की वजह से इस प्रोजेक्ट का परीक्षण स्वीडन के किरूना कस्बे में किया जा रहा है. यह परीक्षण गर्मियों के अंत तक किया जाएगा. फिलहाल इसकी तैयारी चल रही है. (फोटोः गेटी)More Related News

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