
'बाइडेन सबसे खराब राष्ट्रपति, हम खत्म कराएंगे रूस-यूक्रेन युद्ध', अमेरिका के चेसापीक में बोले डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिका के चेसापीक में डोनाल्ड ट्रंप की रैली ऐतिहासिक ग्रीनब्रियर फार्म में हुई. यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. स्थानीय मीडिया के मुताबिक कैंपेन से 15 घंटे पहले ही लोग अपनी जगह पक्की करने के लिए लाइन में लग गए थे. ट्रंप चेसापीक में 'गॉड ब्लेस द USA' का नारा लगाते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. रैली में ट्रंप ने जमकर बाइडेन पर निशाना साधा.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार दोपहर (अमेरिका के समयानुसार) को चेसापीक में अपनी पहला पब्लिक कैंपेन किया. इस दौरान उन्होंने जमकर जो बाइडेन पर निशाना साधा. दरअसल, अमेरिका में इस साल नवंबर में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है. मुकाबला वर्तमान राष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन और रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप के बीच है. गुरुवार (अमेरिकी समयानुसार) को दोनों के बीच पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई. इसके बाद दोनों नेताओं ने पब्लिक कैंपेन किया.
चेसापीक में ट्रंप की रैली ऐतिहासिक ग्रीनब्रियर फार्म में हुई. यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. स्थानीय मीडिया के मुताबिक कैंपेन से 15 घंटे पहले ही लोग अपनी जगह पक्की करने के लिए लाइन में लग गए थे. ट्रंप चेसापीक में 'गॉड ब्लेस द USA' का नारा लगाते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. इस दौरान उन्होंने टैक्स, प्रवासी जैसे मुद्दों पर बाइडेन को घेरा और कहा कि वे ताकत के जरिए शांति बहाल करेंगे. वे यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करवाएंगे.
'क्या बाइडेन का फिर राष्ट्रपति बनना सही है?'
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए ट्रंप ने कहा कि बाइडेन का पूरे अमेरिका में सम्मान नहीं किया जाता. उन्होंने दावा किया कि बाइडेन खुद का जिक्र करते हुए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पर हमला करने के लिए कानून प्रवर्तन का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान बहस यह नहीं है कि क्या बाइडेन 90 मिनट की बहस में टिक सकते हैं, बल्कि यह है कि क्या अमेरिका के लिए बाइडेन का एक बार फिर राष्ट्रपति बनना सही है? यह देश का सबसे करीबी द्वितीय विश्व युद्ध है, और बाइडेन इसमें बेहद अक्षम हैं.
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लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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