
बांग्लादेश में बनेगी 'राज्यसभा', PM की शक्ति में कटौती, रेफरेंडम का 'Yes vote' बदल देगा पावर गेम!
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बांग्लादेश के चुनाव नतीजों की चर्चा तो हर जगह है लेकिन बांग्लादेश जनमत संग्रह के नतीजे और भी अहम हैं. अब बांग्लादेश के संविधान में बड़े बदलावों को जनता ने हरी झंडी दे दी है. बांग्लादेश प्रधानमंत्री की शक्तियों में कटौती करने जा रहा है और राष्ट्रपति की ताकत बढ़ेगी, इसके अलावा इस देश में संसद के ऊपरी सदन का गठन होगा.
बांग्लादेश चुनाव और जनमत संग्रह के नतीजों के बाद इस मुल्क की राजनीति में आमूल-चूल बदलाव होने वाला है. बांग्लादेश को न सिर्फ नए नेता, नई पार्टी का नेतृत्व मिला है. बल्कि जनमत संग्रह की वजह से वहां की संसदीय राजनीति में बदलने वाली है. बांग्लादेश में अब राज्यसभा का गठन होगा, प्रधानमंत्री के अधिकार कम होंगे, राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ेंगी और सांसद अहम मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर भी मतदान कर सकेंगे.
बांग्लादेश के हर नागरिक ने 12 फरवरी को दो वोट डाला था. एक वोट नई सरकार चुनने का था तो दूसरा जनमत संग्रह का था. ये जनमत संग्रह बांग्लादेश के संविधान में संशोधन को लेकर था. इसे 'जुलाई चार्टर' के नाम से जाना जाता है. बांग्लादेश के नागरिकों को ये वोट करना था कि क्या वे संविधान में संशोधन चाहते हैं या अथवा नहीं. इसके लिए उन्हें 'यस वोट' या 'नो वोट' देना था.
जनमत संग्रह के नतीजे बताते हैं कि लोगों ने भारी मतों से 'यस वोट' को चुना है. इसका मतलब यह है कि बांग्लादेश की जनता संविधान में संशोधन चाहती है.
बता दें कि मोहम्मद यूनुस ने जुलाई चार्टर को "नए बांग्लादेश का जन्म" कहा था. जुलाई चार्टर में कुल 84 सुधार प्रस्ताव हैं, जिनमें से कुछ के लिए संविधान संशोधन जरूरी है और कुछ कानून/आदेश से लागू हो सकते हैं. बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे तारिक रहमान के सामने अब चुनातियां होंगी कि वे इस चार्टर को लागू करें.
आइए समझते हैं कि इस जनमत संग्रह से बांग्लादेश में क्या क्या बदलेगा?
'राज्यसभा' का गठन

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