
बर्फ के पहाड़ों के बीच रास्ता भटका शख्स, 10 दिनों तक टूथपेस्ट खाकर जिंदा रहा
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चारों तरफ बर्फ ही बर्फ उस बीच एक 18 साल का युवक रास्ता भटक गया. ऐसे में इन मुश्किल हालातों के बीच 10 दिनों तक वह सिर्फ टूथपेस्ट और पिघला हुआ बर्फ खाकर जिंदा रहा.
एक शख्स 10 दिनों तक बर्फ से ढंके पहाड़ों के बीच भटकता रहा. इस दौरान वह सिर्फ टूथपेस्ट खाकर जीवित रहा. यह हैरान कर देने वाला मामला चीन का है. यहां उत्तर-पश्चिमी चीन के बर्फीले पहाड़ी इलाके में 10 दिनों तक फंसे रहने के बाद एक 18 वर्षीय युवक को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है.
जिमू न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उस 10 दिनों की अवधि के दौरान जब युवक को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा, तब उसने सुन लियांग नदी के पानी, पिघली हुई बर्फ और यहां तक कि टूथपेस्ट को खाकर खुद को जीवित रखने में कामयाब रहा.
खतरनाक प्रतिबंधित क्षेत्र में घुस गया था युवक सन नाम के इस शख्स ने 8 फरवरी को अपनी एकल पैदल यात्रा की शुरुआत की और क्विनलिंग पहुंचा , जो शांक्सी प्रांत में एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है, जो लगभग 2,500 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है. यहां उसने खतरनाक और प्रतिबंधित ताओ-लाइन पर चलना शुरू किया. पिछले 20 वर्षों में, इस खतरनाक रास्ते पर 50 से अधिक पैदल यात्री लापता हो चुके हैं या अपनी जान गंवा चुके हैं.
दो दिनों बाद परिवार से टूट गया संपर्क दो दिन बाद ही सन का अपने परिवार से संपर्क टूट गया, क्योंकि उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी खत्म हो गई थी. जंगल में फंसे सन ने बताया कि वह एक नाले के किनारे नीचे की ओर चल रहा था और कई बार गिरा भी, जिसके कारण उसका दाहिना हाथ में फ्रैक्चर हो गया. तेज हवाओं से बचने के लिए उसने एक बड़ी चट्टान के पीछे शरण ली और सूखे भूसे और पत्तियों का उपयोग करके एक अस्थायी बिस्तर बनाया. 17 फरवरी को बचाव दल ने उन्हें ढूंढ निकाला.
रिपोर्ट के अनुसार, एक स्थानीय खोज और बचाव दल उसके परिवार के अनुरोध पर पहाड़ों में गया. सन जब आग जला रहा था तो बचाव दल को धुएं की गंध आई. फिर सन मदद के लिए चिल्लाया. इस वजह से उसने बचाव दल का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.
इस रास्ते पर गायब हो चुके हैं 50 से अधिक यात्री 170 किमी लम्बी एओ-ताई लाइन, जिस मार्ग पर सन चल रहा था, एओ पर्वत और ताइबाई पर्वत को जोड़ती है. यह अपने बेहद अप्रत्याशित मौसम के कारण इसे चीन के पांच सबसे मुश्किल पैदल मार्गों में से एक माना जाता है. पिछले दो दशकों में इस खतरनाक रास्ते पर 50 से अधिक पैदल यात्री लापता हो चुके हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है.

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