
बंगाल की जंग: ‘खेला होबे’ के इर्द-गिर्द घूमता चुनावी खेल
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पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की रैलियों में आक्रामक उत्साह के साथ नेता और कार्यकर्ता ‘खेला होबे’ का नारा बुलंद कर रहे हैं.
‘खेला होबे’-तृणमूल कांग्रेस नेता देबांग्शु भट्टाचार्य का दिया यह नारा आज पार्टी पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की रैलियों में आक्रामक उत्साह के साथ नेता और कार्यकर्ता बुलंद कर रहे हैं. इस नारे से खिलाड़ियों की तरह चुनौती की भावना झलकती है कि ‘बेहतर की जीत होगी’. लेकिन मतदाताओं को यह नकारात्मक संकेत ज्यादा देता है. पश्चिम बंगाल के चुनाव शायद ही कभी शांतिपूर्ण रहे हों. इस राज्य में चुनाव प्रचार अपने पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, हिंसा और मौतें इसका हिस्सा है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा में मारे गए 16 लोगों में से सात बंगाल के थे. 2018 में पंचायत चुनाव में 34 प्रतिशत सीटों में जहां विपक्ष का कोई उम्मीदवार नहीं था छह लोगों की जान गई और 43 लोग मारे गए थे. 2019 के आम चुनाव में तीन लोग मारे गए और 337 हिंसा की बड़ी वारदातें हुईं. यहां हिंसा का दौर तब से चल रहा है और अब तक भाजपा और टीएमसी दोनों पक्षों से कुल 47 लोगों की मौत हो चुकी है.More Related News

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