
'बंकर-बस्टर्स बमों की रेंज 65 मीटर, परमाणु ठिकाने जमीन के 100 मीटर नीचे', अमेरिकी हमले में ईरान को कितना नुकसान?
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झांग जुनशे ने कहा कि अमेरिकी हमलों की पहली लहर ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं रही होगी. उदाहरण के लिए, फोर्डो साइट ठोस चट्टान के 90 मीटर नीचे स्थित है, जो इसे अत्यधिक प्रतिरोधी बनाता है. झांग ने कहा कि अमेरिका ने 30,000 पाउंड के जीबीयू-57 बंकर बस्टर्स से लैस बी-2 बमवर्षक विमानों से ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले किए, जिनके बारे में माना जाता है कि वे केवल 65 मीटर तक ही घुस सकते हैं.
चीन के आधिकारिक मीडिया ने रविवार को ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी बम हमलों की आलोचना की, जबकि यहां के विशेषज्ञों ने कहा कि हमलों में इस्तेमाल किए गए बंकर-बस्टर बम ईरान के भूमिगत परमाणु संयंत्रों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते. अमेरिका ने रविवार की सुबह ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु प्रतिष्ठानों पर बम गिराए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने तीन परमाणु केंद्रों पर बहुत सफल हमला किया है.
ईरान के परमाणु स्थलों पर हमलों में अमेरिकी बी2 स्टील्थ बॉम्बर्स शामिल थे. चीन ने शनिवार को युद्ध रोकने के लिए ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष विराम का आह्वान किया था. उसने अभी तक अमेरिकी हवाई हमलों पर आधिकारिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है. चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली के एक संपादकीय में कहा गया कि ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर अमेरिका के एकतरफा सैन्य हमले एक लापरवाहीपूर्ण कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन है, जो संघर्ष को और बढ़ाएगा. इसमें कहा गया है कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती है और हमलों ने स्थिति को और अधिक खराब कर दिया है.
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अमेरिकी हमले में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को कितना नुकसान?
चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान की वास्तविक प्रभावशीलता अब भी अस्पष्ट है, तथा हो सकता है कि ये हमले ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट करने के लिए पर्याप्त न हों. चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के असिस्टेंट रिसर्च फेलो ली जिक्सिन ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि फोर्डो का परमाणु संयंत्र जमीन से लगभग 100 मीटर नीचे स्थित है, जिससे इसे एक या दो हमलों से पूरी तरह नष्ट करना बहुत कठिन है, यहां तक कि बंकर-बस्टर बमों का उपयोग करके भी ऐसा नहीं किया जा सकता है. सैन्य मामलों के विशेषज्ञ झांग जुनशे ने भी इसी प्रकार का विचार व्यक्त किया.
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