
फ्रीज और स्मार्ट टीवी के बिल निकालकर ED ने जोड़े जमीन घोटाले के तार... हेमंत सोरेन के दावे को ऐसे किया खारिज
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ईडी ने 191 पन्नों की चार्जशीट में हेमंत सोरेन, राजकुमार पाहन, हिलारियास कच्छप, भानु प्रताप प्रसाद और बिनोद सिंह को आरोपी बनाया है. उस जमीन के टुकड़े को भी ईडी ने 30 मार्च को कुर्क कर लिया है और जिसकी कीमत 31.07 करोड़ रुपये से अधिक है.
ईडी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 31 करोड़ रुपये से अधिक की 8.86 एकड़ जमीन अवैध रूप से हासिल की थी. ईडी ने कोर्ट में अपने इस दावे के समर्थन में एक रेफ्रिजरेटर और स्मार्ट टीवी का बिल सबूत के रूप में पेश किया है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने ये रसीदें रांची स्थित दो डीलरों से प्राप्त कीं और उन्हें पिछले महीने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नेता और चार अन्य के खिलाफ दायर अपने आरोप पत्र में संलग्न किया था. रांची में न्यायाधीश राजीव रंजन की विशेष पीएमएलए अदालत ने 4 अप्रैल को ईडी की शिकायत पर संज्ञान लिया.
हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद 31 जनवरी को कथित भूमि घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था. वह फिलहाल रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं. ईडी के अनुसार, उपरोक्त दोनों गैजेट संतोष मुंडा के परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदे गए थे, जिन्होंने एजेंसी को बताया कि वे उक्त भूमि (8.86 एकड़) पर 14-15 वर्षों के लिए हेमंत सोरेन की संपत्ति के देखभालकर्ता के रूप में रह रहे हैं. एजेंसी ने हेमंत सोरेन के इस दावे का खंडन करने के लिए कि उनका उक्त भूमि से कोई संबंध नहीं है, संतोष मुंडा के बयान का इस्तेमाल किया.
हेमंत सोरेन का मुखौटा था राजकुमार पाहन: ईडी ईडी ने जमीन के टुकड़े पर राजकुमार पाहन नाम के व्यक्ति के दावे को भी खारिज कर दिया. ईडी ने आरोप लगाया कि वह (राजकुमार पाहन) हेमंत सोरेन द्वारा संपत्ति को अपने नियंत्रण में रखने के लिए सिर्फ एक 'मुखौटा' था. ईडी ने दावा किया कि पिछले साल अगस्त में इस मामले में जब सोरेन को पहला समन जारी हुआ उसके तुरंत बाद, राजकुमार पाहन ने रांची के उपायुक्त को एक पत्र लिखा. पाहन ने दावा किया कि जमीन का मालिकाना हक उसके और कुछ अन्य लोगों के पास है. पाहन ने रांची के उपायुक्त से मांग की थी कि अन्य मालिकों के नाम पर पहले का म्यूटेशन रद्द करके उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल होने से बचाया जाए.
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ईडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से दो दिन पहले 29 जनवरी को राजकुमार पाहन को जमीन 'बहाल' कर दी, ताकि झामुमो नेता का नियंत्रण और कब्जा 'निर्बाध' बना रहे. ईडी के अनुसार, भूमि मूल रूप से एक 'भुइंहारी' संपत्ति थी जिसे सामान्य परिस्थितियों में किसी को हस्तांतरित या बेचा नहीं जा सकता था और 'मुंडा' और 'पाहन' ऐसी भूमि संपत्ति के मालिक के रूप में खड़े किए गए. ईडी ने दावा किया कि मूल मालिकों द्वारा जमीन कुछ व्यक्तियों को बेच दी गई थी. लेकिन हेमंत सोरेन ने उन खरीददारों को 'बेदखल' कर दिया और 2010-11 में जमीन पर नियंत्रण हासिल कर लिया.
सोरेन की संपत्ति की देखभाल करता था मुंडा: ईडी

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