
फेयरवेल स्पीच में बाइडेन के टारगेट पर अमेरिका के 'Super Rich', बोले- इनके चंगुल से मिडिल क्लास को निकालना होगा
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अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि मैं हमेशा सोचता रहा हूं कि हम असल कौन हैं और हमें क्या बनना चाहिए. उन्होंने न्यूयॉर्क में स्थापित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का हवाला देते हुए कहा कि ठीक इस प्रतिमा की तरह अमेरिका का विचार सिर्फ एक व्यक्ति की उपज नहीं है बल्कि इस दुनियाभर के अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने मिलकर सींचा है.
अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति के तौर पर जो बाइडेन ने आज आखिरी बार देश को संबोधित किया. उन्होंने ओवल ऑफिस से दी अपनी फेयरवेल स्पीच में देश की की सुपर रिच क्लास पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी समाज में दौलतमंदों का बोलबाला बढ़ रहा है, जो खतरनाक रूप ले रहा है.
बाइडेन ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि मैं हमेशा सोचता रहा हूं कि हम असल कौन हैं और हमें क्या बनना चाहिए? उन्होंने न्यूयॉर्क में स्थापित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रतिमा की तरह अमेरिका का विचार सिर्फ एक व्यक्ति की उपज नहीं है बल्कि इस दुनियाभर के अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने मिलकर सींचा है.
बाइडेन ने कहा कि अमेरिका होने का मतलब लोकतांत्रिक संस्थानों का सम्मान करना है. लगभग पचास सालों के राजनीतिक जीवन के बाद मैं कह सकता हूं कि अमेरिका होने का मतलब लोकतंत्र का सम्मान है. खुला समाज और स्वतंत्र प्रेस इसकी आधारशिला हैं. शक्तियों और कर्तव्यों का संतुलन बनाए रखना हमेशा परफेक्ट नहीं हो सकता लेकिन इसने लगभग 250 सालों तक हमारे लोकतंत्र को मजबूत किया है.
बाइडेन ने अपनी सरकार की उपलब्धियों पर बात करते हुए कहा कि हमने इतने सालों में मिलकर क्या किया है. इसका प्रभाव क्या हुआ है. इसे समझने में अभी समय लगेगा. लेकिन हमने जो बीज बोए हैं, वह विशाल वृक्षों के रूप में बढ़ेंगे और दशकों तक लाभ देते रहेंगे.
बाइडेन ने कहा कि नाटो को और सशक्त करना, गन सेफ्टी कानूनों को लागू करना और बुजुर्गों के लिए दवाओं की कीमतें कम करना हमारे प्रशासन की कुछ उपलब्धियां हैं.
बता दें कि बाइडेन ने राष्ट्रपति के तौर पर पांचवीं और आखिरी बार ओवल ऑफिस से देश को संबोधित किया. इससे पहले उन्होंने 24 जुलाई को देश को ओवल ऑफिस से संबोधित कर कहा था कि वह 2024 राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ से पीछे हट रहे हैं.

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