
NATO का विस्तार रूस के लिए चिंता की बात? वर्ल्ड एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में पुतिन ने दिया ये जवाब
AajTak
'आजतक' के साथ वर्ल्ड एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई मुद्दों पर खुलकर बात की. नाटो विस्तार से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक देश की सुरक्षा दूसरे देश की कीमत पर नहीं हो सकती.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोहराया कि यूक्रेन को अपने बचाव के साधन चुनने का अधिकार है, लेकिन ऐसे तरीके से नहीं, जो रूस की सुरक्षा को खतरे में डाल दे. ‘आजतक’ की मैनेजिंग एडिटर अंजना ओम कश्यप और इंडिया टुडे की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन को मॉस्को के क्रेमलिन में दिए वर्ल्ड एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में पुतिन ने तमाम सवालों का बेबाकी से जवाब दिया.
इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या NATO का विस्तार आपके लिए चिंता का विषय है या बहाना है उन इलाकों को वापस लेने का? इसके जवाब में व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि NATO एक बिल्कुल अलग मामला है. रूसी भाषा, उसकी संस्कृति, रूसी धर्म और यहां तक कि क्षेत्रीय मुद्दे, ये सभी बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं. सबसे पहले जो बात सभी पर लागू है कि किसी भी देश की सुरक्षा, किसी अन्य देश की सुरक्षा का उल्लंघन करके नहीं होती. हर देश को अपनी सुरक्षा अपने तरीके से करने का हक है. क्या हम यूक्रेन को इस चीज के लिए मना करेंगे, बिल्कुल नहीं. पर इसका मतलब ये नहीं कि वो रूस की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाएं.
पुतिन ने आगे कहा कि यूक्रेन को नाटो से जुड़कर अपनी सुरक्षा करनी है. और ये रूस के लिए हानिकारक है. हमने कोई भी ऐसी नाजयज मांग नहीं की थी कि ऐसा लगे कि सिर पर पहाड़ टूट पड़ा. हम सिर्फ इस उम्मीद पर हैं कि हमें वो मिले जो तय था, और ये हमने कोई कल ही सोचकर तय नहीं किया. ये सोवियत संघ के समय में तय हुआ था. 90 के दशक में ये हमारे लिए खतरा था, इसका सबूत हैं वो पहले दस्तावेज जिन पर हस्ताक्षर हुए. इसमें ये बात साफतौर पर लिखी गई जब यूक्रेन अलग हुआ तो उसने अपने आपको न्यूट्रल स्टेट घोषित किया.
बता दें कि NATO के विस्तार का मुद्दा लंबे समय से विवाद में है, जिसमें रूस ने 14 पूर्व वारसॉ संधि देशों की सदस्यता पर सवाल उठाया है. यूक्रेन NATO में शामिल होना चाहता है ताकि उसे विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी मिल सके. रूस की तुलना में उसकी सेना और रक्षा बजट छोटा है, इसलिए यूक्रेन के अधिकारी NATO को सर्वोत्तम विकल्प मानते हैं.
इतिहास की बात करें तो 1917 से पहले रूस और यूक्रेन रूसी साम्राज्य का हिस्सा थे और बाद में सोवियत संघ में शामिल हो गए. 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन स्वतंत्र हुआ और उसके पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों के राजनीतिक रुझान अलग हो गए. यूक्रेन का पूर्वी हिस्सा रूस के करीब रहा, जबकि पश्चिमी हिस्सा यूरोपीय संघ के साथ जुड़ता गया. पूर्वी यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर रूसी समर्थित विद्रोहियों का नियंत्रण है और मॉस्को डोनेत्स्क और लुहान्स्क को अलग इकाइयों के रूप में मान्यता देता है.
2014 में रूस ने क्रीमिया का विलय कर लिया, जिससे तनाव और बढ़ गया और यूक्रेन की सुरक्षा साझेदारियां मजबूत करने की इच्छा भी. रूस का मानना है कि अगर यूक्रेन NATO में शामिल होता है, तो इससे NATO सेना सीधे उसके दरवाजे पर पहुंच जाएगी, जिसे मॉस्को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अस्वीकार्य खतरा मानता है.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?







