
फिलिस्तीन, इमीग्रेशन और एनर्जी... ट्रंप ने तीन मुद्दों पर ब्रिटिश पीएम स्टार्मर से जताई नाराजगी, बोले- सहमत नहीं
AajTak
अमेरिका और ब्रिटेन, दोनों नेता शांति और रोड मैप पर एकमत हैं. स्टार्मर ने मान्यता के समय पर स्पष्ट किया कि यह स्टेट विजिट से संबंधित नहीं है और उन्होंने ट्रंप के साथ समाधान की दिशा में बातचीत की.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने स्टेट विजिट के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद कहा कि वे फिलिस्तीन स्टेट को मान्यता देने के मामले में स्टार्मर से असहमत हैं. ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "इस मुद्दे पर मेरी प्रधानमंत्री से असहमति है, यह वास्तव में हमारी कुछ कम असहमतियों में से एक है."
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से दो मुद्दों पर सहमत नहीं हैं - इमिग्रेशन और एनर्जी. ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से कहा, "मैं दो बातों पर असहमत हूं. पहला, इमिग्रेशन जो ब्रिटेन के लिए बहुत मुश्किल है. दूसरा, एनर्जी."
वहीं, स्टार्मर ने कहा कि वे और ट्रंप क्षेत्र में शांति के अंतिम लक्ष्य पर एकमत हैं. उन्होंने कहा, "हम पूरी तरह सहमत हैं कि शांति और रोड मैप की आवश्यकता है, क्योंकि गाजा की स्थिति असहनीय है."
यह भी पढ़ें: फिलिस्तीन को राज्य का दर्जा देने के सपोर्ट में भारत, UN में प्रस्ताव के पक्ष में किया वोट
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने फिलिस्तीन स्टेट को मान्यता देने के लिए ट्रंप के देश छोड़ने का इंतजार किया है, तो स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि "मैंने जुलाई के अंत में समय को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी, जिसका इस स्टेट विजिट से कोई लेना-देना नहीं है."
स्टार्मर ने यह भी कहा कि उन्होंने ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की, "जैसा कि आप उम्मीद करेंगे, दो ऐसे नेता जो एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और एक-दूसरे को पसंद करते हैं, और जो सर्वोत्तम समाधान लाने की कोशिश कर रहे हैं."

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.







