
पेरू के राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को पद से हटाया, पहली बार महिला राष्ट्रपति को मिली कमान
AajTak
पेरू के राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को महाभियोग के जरिए पद से हटाए जाने के बाद डीना बोलुआर्टे के रूप में देश को पहली महिला राष्ट्रपति मिल गई हैं. कैस्टिलो पर आरोप है कि उन्होंने संसद भंग करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें महाभियोग के जरिए हटा दिया गया.
पेरू में पिछले कुछ समय से जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं. पेरू कांग्रेस ने राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो को पद से हटा दिया है. उनकी जगह उपराष्ट्रपति डीना बोलुआर्टे को देश का अगला राष्ट्रपति बनाया गया है. वह पेरू के लोकतांत्रिक इतिहास में राष्ट्रपति पद संभालने वाली पहली महिला बन गई हैं.
पेड्रो ने देश में संसद को भंग करने और इमरजेंसी सरकार बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद पेरू कांग्रेस ने उनके खिलाफ महाभियोग चलाकर उन्हें पद से हटा दिया.
पेरू की 130 सदस्यीय कांग्रेस में राष्ट्रपति पेड्रो को पद से हटाने के लिए 101 विधायकों ने वोटिंग की. वोटिंग के दौरान महाभियोग के पक्ष में 101 वोट पड़े जबकि इसके खिलाफ सिर्फ छह वोट पड़े. वहीं, 10 सांसदों ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी.
इसके बाद पेड्रो ने आधीरात में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वह बेहद ईमानदार शख्स हैं और उनकी ईमानदारी पर कोई उंगली नहीं उठा सकता. उन्होंने खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से भी इनकार किया है.
बता दें कि पेरू की राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले डीना देश की उपराष्ट्रपति थीं. डीना बोलुआर्टे जुलाई 2026 तक इस पद पर रहेंगी. उन्होंने शपथ लेने के बाद देश को इस संकट से उबरने के लिए राजनीतिक संधि का आह्वान किया.
कैसे शुरू हुआ विवाद?

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.







