
पुतिन के खिलाफ बगावत करने वाले येवगेनी रूस लौटे, बेलारूस के राष्ट्रपति का खुलासा
AajTak
रूस के प्रशासन के खिलाफ विद्रोह करने वाली किराए की आर्मी के चीफ प्रिगोझिन रूस लौट आए हैं. इस बात का खुलासा बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने किया है. ये वही आर्मी है, जो पहले रूस की सेना के साथ यूक्रेन में लड़ रही थी, लेकिन कुछ समय पहले इस किराए की आर्मी ने रूस प्रशासन के खिलाफ ही बगावत का बिगुल बजा दिया था.
बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको ने वैगनर ग्रुप के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि किराये की आर्मी के मुखिया प्रिगोझिन रूस वापस आ गए हैं, वह इन दिनों सेंट पीटर्सबर्ग में हैं. इतना ही नहीं, वैगनर ग्रुप के सैनिक उन कैंपों में रुके हुए हैं, जहां वह विद्रोह से रूस प्रशासन के खिलाफ बगावत से पहले रुके हुए थे. हालांकि पिछले सप्ताह यह कहा जा रहा था कि प्रिगोझिन बेलारूस में है. लेकिन लुकाशेंको ने गुरुवार को कहा कि प्रिगोझिन सेंट पीटर्सबर्ग में है और वैगनर सैनिक अभी भी अपने शिविरों में हैं.
लुकाशेंको के बयान में इस बात का जिक्र नहीं है कि वैगनर ग्रुप के सैनिक कहां पर रुके हैं, उन्होंने रूस में कहां कैंप लगाए हैं. ये वही सैनिक हैं, जिन्होंने रूस प्रशासन से विद्रोह से पहले यूक्रेन में रूसी सेना के साथ लड़ाई लड़ी थी. बता दें कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने 24 जून को अपने सैनिकों के लिए सुरक्षा गारंटी और बेलारूस जाने की अनुमति के बदले में प्रिगोझिन के विद्रोह के लिए एक सौदा करने में मदद की थी.
विद्रोह के दौरान वैगनर ग्रुप ने दक्षिणी रूसी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन पर कब्ज़ा कर लिया था और रूस की राजधानी मॉस्को की ओर कूच करने से पहले वहां मिलिट्री हेडक्वार्टर पर कब्जा कर लिया था. इस पूरे घटनाक्रम को वैगनर ग्रुप के मुखिया प्रिगोझिन ने रूसी रक्षा मंत्री और जनरल स्टाफ प्रमुख को हटाने के लिए "न्याय का मार्च" बताया. प्रिगोझिन ने दावा किया कि उनके सैनिक मॉस्को के 200 किलोमीटर (124 मील) के भीतर आ गए थे, जब उन्होंने उन्हें लुकाशेंको द्वारा कराए गए समझौते के तहत आगे बढ़ने से रोकने का आदेश दिया था.
क्या है वैगनर ग्रुप, क्यों की थी बगावत?
वैगनर एक प्राइवेट आर्मी है. वैगनर आर्मी रूसी सेना के साथ मिलकर यूक्रेन में युद्ध लड़ रही है. यह पिछले कई सालों से सैन्य और खुफिया ऑपरेशन्स को लेकर विवादों में भी रहा है. वैगनर आर्मी चीफ येवगेनी प्रिगोझिन कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सबसे खास होते थे. लेकिन अब प्रिगोझिन और रूसी सेना के बीच टकराव चल रहा है. प्रिगोझिन ने 23 जून को रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु पर गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया कि रूसी रक्षा मंत्री ने यूक्रेन में वैगनर आर्मी पर रॉकेट से हमले का आदेश दिया. प्रिगोझिन ने कहा था कि वे इस हमले का बदला रूसी रक्षा मंत्री से लेंगे और इसमें रूसी सेना हस्तक्षेप न करे. इसके बाद प्रिगोझिन ने अपने लड़ाकों के साथ यूक्रेन से लौटकर रूस की सीमा में मार्च शुरू कर दिया था.
कौन हैं प्रिगोझिन?

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?







