
पुतिन का कूटनीतिक प्रहार- रूस में मौजूद यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति बोले- अहंकार छोड़ युद्ध रोकें जेलेंस्की
AajTak
यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति ने जेलेंस्की को सलाह दी है कि वे इस युद्ध को तुरंत रोक दें. उनकी माने तो जेलेंस्की को अपना अहंकार अब छोड़ देना चाहिए. उन्हें इस युद्ध को अपनी इज्जत का सवाल नहीं बनाना चाहिए.
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध हर बीतते दिन के साथ और भीषण होता जा रहा है. इस बीच दुनिया के कई देश मांग कर रहे हैं कि बातचीत के जरिए ही इस समस्या का हल निकाल जाए और फिर कूटनीतिक रास्ते पर आया जाए. अब यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति ने भी जेलेंस्की को सलाह दी है. कहा गया है कि वे इस युद्ध को तुरंत रोक दें.
पुतिन का कूटनीतिक प्रहार
उन्होंने जोर देकर बोला है कि अब यूक्रेन के राष्ट्रपति को हर कीमत पर इस युद्ध को रोकना पड़ेगा. उन्होंने ये भी दावा कर दिया है कि भी जेलेंस्की इस युद्ध को अपनी इज्जत का सवाल बना रहे हैं और इसी वजह से वे शांति के रास्ते पर नहीं लौट रहे हैं.अब कहने को ये हमला यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति की तरफ से आया है, लेकिन इसमें रूस की भी सक्रिय भूमिका मानी जा रही है. इसे पुतिन का एक कूटनीतिक प्रहार भी माना जा रहा है.
ऐसा इसलिए है क्योंकि 2014 के बाद से यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति Viktor Yanukovych रूस में रह रहे हैं. 2014 में ही उन्हें देश से निकाल दिया गया था. ऐसे में उनकी वफादारी रूस के लिए ज्यादा मानी जाती है और उनके इस बयान को भी इसी चश्मे से देखा जा रहा है. वैसे बातचीत के जरिए समस्या को हल करने वाली बात तो कई दूसरे देश भी कह रहे हैं. भारत का रुख भी शुरुआत से यही चल रहा है. पीएम मोदी ने हाल ही में जब जेलेंस्की से फोन पर बात की थी, तब साफ कहा गया था कि पुतिन से सीधी बात कर विवादों को सुलझाना चाहिए. उन्होंने किसी भी स्तर पर युद्ध को समाधान नहीं बताया था.
बातचीत का तीसरा दौर
वर्तमान स्थिति की बात करें तो ये युद्ध अब 13वें दिन में जा चुका है. आज तीसरे दौर की बातचीत जरूर होनी है, कुछ मुद्दों पर सहमति भी बन सकती है. लेकिन दोनों देश झुकने को तैयार नहीं हैं. एक तरफ रूस कंप्लीट सरेंडर चाहता है तो वहीं दूसरी ओर यूक्रेन अंतिम सांस तक लड़ने की बात कर रहा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति तो उन दावों का भी लगातार खंडन कर रहे हैं जहां पर कहा जा रहा है कि वे कीव छोड़ जा चुके हैं.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











