
पुणे निकाय चुनाव: BJP उम्मीदवार का रोते हुए ऐलान- चुनाव से नाम वापस ले रही
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पुणे नगर निगम चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार पूजा मोरे को टिकट मिलने के बाद भारी विरोध और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. राजनीतिक पृष्ठभूमि, पुराने बयानों और सोशल मीडिया विवादों ने पार्टी को असहज किया. बढ़ते दबाव और नाराजगी के बीच पूजा मोरे ने भावुक होकर सफाई दी और आखिरकार चुनाव से नाम वापस लेने का फैसला किया.
पुणे निकाय चुनाव में बीजेपी की एक उम्मीदवार पूजा मोरे को भारी विरोध के चलते नाम वापस लेना पड़ा है. उन्होंने रोते हुए अपनी सफाई दी और आखिरकार चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया. पूजा (धनंजय जाधव की पत्नी) को बीजेपी ने पुणे नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार बनाया था. लेकिन टिकट मिलने के बाद से उनपर सवाल खड़े हो रहे थे. पार्टी को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा था.
दरअसल, पूजा मोरे पहले शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस से जुड़ी रही हैं. शादी के बाद वह आठ महीने पहले पुणे शिफ्ट हुईं और राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल रहीं. मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर आरोप भी लगाए थे. इन तमाम तथ्यों के सामने आने के बाद बीजेपी द्वारा उन्हें टिकट दिए जाने पर सोशल मीडिया में पार्टी नेतृत्व को घेरा गया. राहुल गांधी के साथ पूजा मोरे की तस्वीरें और उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट वायरल कर उन्हें ट्रोल किया गया.
पहलगाम आतंकी हमले के वक्त भी पूजा मोरे और धनंजय जाधव जम्मू-कश्मीर में मौजूद थे. मीडिया से बातचीत में पूजा मोरे ने कहा था कि इस हमले को हिंदू-मुस्लिम नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. इस बयान के बाद बीजेपी और हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े कई लोगों ने इस दंपती को देशविरोधी करार दिया, जिससे पार्टी के भीतर भी नाराजगी बढ़ी.
सफाई में क्या बोलीं पूजा मोरे
अब अपनी ट्रोलिंग और उठ रहे सवालों पर पूजा मोरे ने सफाई दी. इस दौरान वो भावुक भी हो गईं. पूजा मोरे ने अपने बयान में कहा कि वह कश्मीर गई थीं और उसी दौरान हमला हुआ. उन्होंने बताया कि कई लोग कमरे में ही रुके रहे, लेकिन उन्होंने बाहर निकलकर पीड़ितों की मदद की, महाराष्ट्र के नागरिकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की और घायलों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी. शुरुआती जानकारी के आधार पर उन्होंने कहा था कि आतंकवाद देश को हिंदू-मुस्लिम में बांटना चाहता है, लेकिन बाद में घायलों से बातचीत के बाद स्पष्ट हुआ कि हमला धर्म पूछकर किया गया.
पूजा मोरे ने यह भी कहा कि मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान उनके नाम से एक विवादित भाषण वायरल किया गया था, जो वास्तव में उनका नहीं था. उन्होंने बताया कि मुंबई में हुए पहले मराठा मोर्चे के समय उनकी उम्र सिर्फ बीस साल थी और उन्होंने मंच से समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी. उनके मुताबिक, उन्होंने कभी भी तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ अपमानजनक या निचली भाषा का इस्तेमाल नहीं किया. मराठा क्रांति मोर्चे की किसी अन्य लड़की के बयान को झूठे तौर पर उनके नाम से जोड़ दिया गया और सोशल मीडिया पर जानबूझकर गलत प्रचार कर उन्हें निशाना बनाया गया.

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