
पार्टी के इकलौते सांसद और अब केंद्र में मंत्री, जानिए पूर्व CM मांझी के 44 साल का पॉलिटिकल करियर
AajTak
हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और अपनी पार्टी के इकलौते सांसद जीतन राम मांझी भी मोदी सरकार में मंत्री बन गए हैं. 44 सालों के पॉलिटिकल करियर में मांझी राज्य सरकार में कई बार मंत्री बन चुके हैं लेकिन पहली बार वो मोदी सरकार में मिनिस्टर बने हैं. मांझी ने एनडीए उम्मीदवार के तौर पर इस बार गया (रिजर्व सीट) से चुनाव लड़ा था और भारी मतों के अंतर से चुनाव जीता था.
लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र में नई सरकार का गठन हो गया है जिसमें एनडीए के कई घटक दलों के नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली. बिहार से हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के मुखिया और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी भी मोदी सरकार में पहली बार मंत्री बनाए गए हैं. उन्होंने भी राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली है. हालांकि अभी उनके मंत्रालय या विभाग का बंटवारा नहीं हुआ है.
रविवार को शपथग्रहण से पहले ही उन्हें मंत्री बनने के लिए फोन चला गया था. जीतन राम मांझी एनडीए उम्मीदवार के तौर पर इस बार गया (रिजर्व सीट) से चुनाव जीतकर सांसद बने हैं और अपनी पार्टी के इकलौते सांसद हैं. जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी बिहार सरकार में मंत्री है जबकि जीतन राम मांझी पहली बार केंद्र में मंत्री बने हैं.
मांझी के 44 सालों का पॉलिटिकल करियर
जीतन राम मांझी के राजनीतिक करियर की बात करें तो वो पहली बार साल 1980 में कांग्रेस के टिकट पर गया के फतेहपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बने थे. इसके बाद मांझी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वो लगातार राजनीति में सक्रिय हैं.
44 साल के अपने पॉलिटिकल करियर में जीतन राम मांझी जनता दल (1990-1996), राष्ट्रीय जनता दल (1996-2005) और जेडीयू जैसे (2005-2015) दलों में रहे हैं. साल 2015 में जेडीयू से अलग होकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का गठन किया. वो पहली बार अस्सी के दशक में ही चुनाव जीतकर चंद्रशेखर सिंह के नेतृत्व वाली बिहार सरकार में मंत्री भी बन गए थे.
लालू-राबड़ी के दौर में भी मंत्री रह चुके हैं मांझी

MP विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को उस समय मर्यादाएं तार-तार हो गईं, जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस ने अपमानजनक मोड़ ले लिया. सदन में इस्तेमाल किए गए असंसदीय शब्दों के कारण न केवल कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, बल्कि मुख्यमंत्री को भी मोर्चा संभालना पड़ा.

केरल स्टोरी 2 फिल्म को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. मुस्लिम पक्ष इस फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी सरकार का प्रोपेगेंडा बता रहा है. दूसरी ओर, फिल्म मेकर और सरकार के समर्थक कह रहे हैं कि जो भी घटनाएं हुई हैं, उन्हीं पर इस फिल्म की कहानी आधारित है. इसी बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस फिल्म पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.











