
पारिवारिक आय, बिजली खपत और जमीन... कैसे परिवार की महिला मुखिया को 1000 रुपये देगी तमिलनाडु सरकार
AajTak
तमिलनाडु सरकार राज्य में हर परिवार की महिला मुखिया को 1000 रुपये की वित्तीय सहायता देने जा रही है. इसके लिए योजना की पात्र महिलाओं के लिए क्राइटेरिया तय किया गया है. योजना की पात्रता के लिए महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय, मासिक बिजली खपत और संपत्ति के तौर पर मौजूद भूमि को आधार बनाया गया है.
तमिलनाडु सरकार अपने चुनावी वादे के मुताबिक, परिवार की महिला मुखिया को अतिरिक्त वित्तीय सहायता दिए जाने की अपनी योजना पर जुट गई है. सीएम एमके स्टालिन ने शुक्रवार को इस योजना पर सुझावों और इस पर ठीक से काम किए जाने के लिए जिला कलेक्टरों की बैठक ली. इसके साथ ही योजना के लिए पात्र महिलाओं के लिए क्राइटेरिया की भी लिस्ट तैयार की गई है. इस योजना के तहत परिवार के महिला मुखिया को हर महीने 1000 रुपये की वित्तीय सहायता दिए जाने का ऐलान किया गया है.
सीएम एमके स्टालिन ने की बैठक मुख्यमंत्री स्टालिन ने योजना के ठीक से संचालित होने के संबंध में शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों और जिलाधिकारियों के साथ पहली बैठक की. उन्होंने कहा कि 'यह तमिलनाडु में लागू होने वाली एक बड़ी योजना है. एक करोड़ लाभार्थियों के लक्ष्य वाली इस योजना के लिए 1.5 करोड़ आवेदन प्राप्त हो सकते हैं. इसलिए, जिलाधिकारियों को लाभार्थियों की पहचान करने में पूरा ध्यान रखना चाहिए.' उन्होंने कहा कि, योजना इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचे और कोई भी पात्र छूट न जाए.
योजना को दिया गया है यह नाम समीक्षा बैठक को ऑनलाइन से संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा, ‘‘यह हमारे कलैग्नार का जन्म शताब्दी वर्ष है, इसलिए वित्तीय सहायता योजना का नाम ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थोगई थिट्टम’ रखा गया है. यह योजना 15 सितंबर को लॉन्च की जाएगी, जो डीएमके के संस्थापक और द्रविड़ आइकन सीएन अन्नादुरई की जयंती है. सरकार द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, केवल 21 वर्ष से अधिक उम्र (15 सितंबर 2002 से पहले जन्मी) की महिलाएं ही इस योजना के लिए आवेदन कर सकती हैं.
योजना के लिए तय की गई है ऐसी आर्थिक पात्रता
1. पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम होनी चाहिए.
2. परिवार के पास 5 एकड़ से अधिक गीली भूमि/10 एकड़ सूखी भूमि नहीं होनी चाहिए.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









