
पानी में बह गया जनता का पैसा! बिहार के उन 6 पुलों की कहानी जो बनने से पहले ही हो गए धराशायी
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बिहार में बीते दो सालों में 6 पुल गिर चुके हैं जिससे जनता के टैक्स का करोड़ों रुपये पानी में बह गया. राज्य में कई पुल तो ऐसे हैं जो निर्माण के दौरान ही दो बार धराशायी हो चुके हैं. ताजा मामला सुपौल का है जहां कोशी नदी पर बन रहा करीब 10 किलोमीटर लंबा पुल निर्माण के दौरान ही जमींदोज हो गया. इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई.
बिहार के सुपौल में शुक्रवार तड़के एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिर जाने की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि नौ लोग घायल हो गए. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा मधुबनी के भेजा और सुपौल जिले के बकौर के बीच कोशी नदी पर 10.2 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण किया जा रहा था जिसका एक हिस्सा ढह गया.
इस पुल में 171 खंभे हैं और खंभा नंबर 153 और 154 के बीच का हिस्सा टूट गया है. सड़क निर्माण विभाग संभालने वाले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात की है. हालांकि बिहार में यह पहला मामला नहीं है जिसमें कोई पुल निर्माण के दौरान ही जमींदोज हो गया. बीते एक साल में बिहार में पुल गिरने की लंबी फेहरिस्त है.
4 जून 2023 को गिरा था खगड़िया में बन रहा पुल
बीते साल 4 जून को खगड़िया के अगुवानी गंगा घाट पर निर्माणाधीन पुल तीन पाया समेत पूरा सेगमेंट गंगा में समा गया था. इस पुल के गिरने के लिए घटिया सामग्री के इस्तेमाल और पुल के डिजाइन में गलती को जिम्मेदार बताया था. इस पुलिस की लागत 1700 करोड़ रुपये थी. नीतीश कुमार ने इस मामले में जांच के आदेश भी दिए थे. यह पुल निर्माण के दौरान ही साल 2022 में भी गिर गया था जिसके बाद इसके डिजाइन को तैयार करने वाली फर्म को जिम्मेदार ठहराया गया था.
19 फरवरी को पटना में भी गिरा था पुल
खगड़िया हादसे से पहले बीते साल फरवरी महीने में राजधानी पटना में बना रहा एक निर्माणाधीन पुल भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था. बिहटा-सरमेरा फोर लेन मार्ग पर रुस्तमंगज गांव में बन रहा एक पुल भरभरा कर गिर गया था. इस पुल को बनाने में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा था.

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