
पाकिस्तान से क्यों निकाले जा रहे अफगान शर्णार्थी? खैबर में रहने वाले अफगानियों का शहबाज सरकार ने मांगा डेटा
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पाकिस्तान में वर्तमान में सरकार का कड़ा रुख बलूच नेताओं की गिरफ्तारी और अफगान छात्रों की जानकारी इकट्ठा करने पर केंद्रित है. अफगान नागरिकों की वापसी के लिए मार्च 31 की समय सीमा तय की गई है. इस प्रक्रिया में मानवीय सहायता प्रदान की जाएगी, लेकिन समय सीमा के बाद रुकने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
पाकिस्तान में हाल के दिनों में राजनीतिक और सामाजिक हालात ने एक नया मोड़ ले लिया है. एक तरफ सुरक्षा बल और पुलिस बलूच आंदोलनकारियों पर शिकंजा कस रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ देश के आंतरिक मंत्रालय ने खैबर पख्तूनख्वा में अफगान छात्रों की संख्या का रिकार्ड मांगा है. इंडिया टुडे को मिली आधिकारिक चिट्ठी से पता चलता है कि मंत्रालय ने प्रांतीय गृह सचिव को 27 मार्च तक अफगान छात्रों की पूरी जानकारी सौंपने के निर्देश दिए हैं.
पाकिस्तान में इस समय बिना दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों, खासकर अफगान नागरिक कार्ड (एसीसी) धारकों के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा रही है. सरकार ने सभी अवैध अफगान नागरिकों को देश छोड़ने के लिए 31 मार्च की समय सीमा तय की है.
दरअसल, पाकिस्तान में आए दिनों धमाके और हिंसक घटनाएं देखी जाती है, और पाकिस्तान सरकार इस तरह की घटनाओं लिए अफगानियों को जिम्मेदार मानते हैं. खासतौर पर, जब से अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता संभाली है. हालिया डिपोर्टेशन को लेकर कहा जा रहा है कि उन लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं.
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अधिकारियों के मुताबिक, वापसी अभियान के शुरू होने के बाद से अब तक 876,000 से ज्यादा अफगान पाकिस्तान छोड़ चुके हैं. समय सीमा करीब आते ही और अधिक लोग जाने की संभावना है.
मानवीय तरीके से की जाएगी डिपोर्टेशन की प्रक्रिया

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