
जंग के साये में गल्फ में फीकी पड़ी ईद...दुबई में न आतिशबाजी, न बाजारों में रौनक
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अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की चल रही जंग के बीच खाड़ी देश में ईद मनाई जाएगी. इस बार ईद की न ही बजारों में रौनक दिख रही है और न ही दुबई में आतिशबाजी होगी. इस बार युद्ध के साये में लोग ईद मनाने के लिए मजबूर हैं?
अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही ईरान की जंग के बीच ईद पड़ रही है. दुबई और सउदी सहित खाड़ी देशों में गुरुवार या फिर शुक्रवार को ईद उल फितर मनाई जाएगी. अमेरिकन एयर बेस होने के चलते ईरान लगातार दुबई, कतर, बहरीन सहित गल्फ के देशों को टारगेट कर रहा है. इस तरह जंग के साये में खाड़ी देशों में मुस्लिम समुदाय के लोग ईद मनाने के लिए मजबूर हैं.
रमजान के अंतिम असरा यानि आखिरी के दस दिनों में खाड़ी देशों की ईद के जश्न की तैयारी शुरू हो जाती थी. बजार में रौनक देखने वाली होती है, लोग बड़ी संख्या में खरीदारी करने निकलते थे, लेकिन इस बार पहले जैसा माहौल नहीं. न अरब की बाजारों में रौनक दिख रही है और न ही लोग पहले की तरह खरीदारी कर रहे हैं.
ईद के मौके पर दुबई से लेकर कतर तक तमाम कई गल्फ देशों में होने वाली आतिशबाजी इस बार नहीं होगी. दुबई के बहुचर्चित 'ग्लोबल विलेज, को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है, जहां पर बड़ी संख्या में लोग ईद के मौके पर जाकर जश्न मनाने का काम करते थे. इस तरह से ईद पूरी तरह से अरब में फीकी रहने वाली है.
अरब की बाजारों में नहीं दिख रही रौनक ईद-उल-फितर इस बार अरब देशों में यानि दुबई, सउदी, बहरीन, कतर, ओमान और कुवैत सहित तमाम खाड़ी देशों में 19 या 20 मार्च को मनाई जाएगी. इस बार ईद की खरीदारी के लिए बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं है. हालांकि, परंपरागत रूप से ईद से पहले बाजारों में भारी भीड़ होती है, लेकिन इस बार कुछ अलग ट्रेंड दिख रहे हैं. बजार और मॉल में लोग खरीदारी के लिए बहुत ज्यादा लोग नहीं आ रहे हैं, जैसे कि पहले हुआ करता था.
सउदी के रियाद शहर में लंबे समय से मार्केटिंग सेक्टर में मैनेजर की पोस्ट पर जॉब कर रहे मो. वामिक बताते हैं कि इस बार ईद की खरीदारी पहले जैसे लोग नहीं कर रहे हैं जबकि रियाद में ईद से बीस दिन पहले ही बाजारों में भीड़ होने लगती थी. ईद के लिए खरीदारी करने और लोगों उपहार देने में थोड़ा सतर्क दिख रहे हैं, इसकी कई वजह हैं.
वह कहते हैं कि ईरान और युद्ध के चलते सउदी में रहने वाले लोगों के रहन-सहन पर भले ही बहुत ज्यादा असर न पड़ा हो, लेकिन यहां के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर अलर्ट हैं. इसके अलावा लोग बहुत ज्यादा खरीदारी से बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर युद्ध ऐसे ही चलता रहा तो उनके सामने इकोनॉमी दिक्कत हो सकती है. इसीलिए खरीदारी करने में एहतियात बरत रहे हैं.

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