
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, इमरान सरकार घिरी
AajTak
पाकिस्तान में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के इतिहास में इतनी कीमतें कभी नहीं हुईं. पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ने से वहां की जनता ने और अपोजिशन के लीडर्स ने इमरान सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.
पाकिस्तान की सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए हैं. पाकिस्तान सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 10 रुपये से 12 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है. इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 159.86 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है. पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की ये अभी तक की सबसे अधिक कीमत है और अभी तक इनकी कीमतों में पहले कभी एक साथ इतनी अधिक वृद्धि नहीं हुई थी.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार यानि 18 जनवरी को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आपात बैठक की. यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के बाद बुलाई गई. जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कई यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही है. जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोपीय संध के प्रमुख देशों ने ट्रंप की इस धमकी की कड़ी निंदा की है.








