
पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच स्थापित समुद्री संबंधों के बाद पहली बार बोले बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त
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पाकिस्तान और बांग्लादेश ने समुद्री संबंध स्थापित किए हैं. पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच समुद्र के जरिए व्यापार देखा जा रहा है. दोनों देशों के बीच ये संबंध स्थापित होने के बाद बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त ने भारत-बांग्लादेश व्यापार संबंधों पर बात की है.
बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में ऐतिहासिक प्रगति देखने को मिली है. 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी के बाद से यह पहली बार है जब पाकिस्तान का एक कार्गो जहाज बांग्लादेश के तट पर रुका. बीते हफ्ते कराची से चला एक जहाज बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी तट पर रुका जो दिखाता है कि हमेशा से दुश्मन की तरह रहे पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच समुद्री रिश्ते स्थापित हो गए हैं.
प्रो. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार के साथ अपने रिश्ते आगे बढ़ा रही है जो बांग्लादेश की विदेश नीति में एक अहम बदलाव का संकेत है. दोनों देशों के बीच समुद्री संबंध स्थापित होने के बाद भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने भारत-बांग्लादेश संबंधों और द्विपक्षीय व्यापार पर टिप्पणी की है.
उन्होंने कहा है कि भारत-बांग्लादेश के बीच आपसी सहयोग बहुआयामी है और इसे किसी एक एजेंडे तक सीमित नहीं रखा जा सकता.
ढाका के सोनारगांव होटल में सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज (सीजीएस) की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का जिक्र किया. सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा, 'हमारे व्यापार और आर्थिक संबंध, हमारी परिवहन और ऊर्जा कनेक्टिविटी और हमारे लोगों के बीच आपसी संपर्क ने उथल-पुथल भरे बदलावों के बावजूद सकारात्मक गति बनाए रखी है. इससे पता चलता है कि हमारे संबंध वास्तव में बहुआयामी हैं और इन्हें किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं किया जा सकता.'
उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ स्थिर और रचनात्मक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है.
वर्मा ने कहा, 'भारत एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश का समर्थन करता रहेगा. हम एक ऐसा रिश्ता कायम रखेंगे जिसमें दोनों देशों के लोगों को फायदा हो. भारत और बांग्लादेश दोनों ही पहले से कहीं अधिक विकसित और सक्षम हैं. आज हम एक-दूसरे पर कहीं अधिक निर्भर हैं. बढ़ती आर्थिक क्षमताओं वाले दो महत्वाकांक्षी देशों के रूप में हमें एक-दूसरे पर अपनी निर्भरता को और अधिक बढ़ाने की जरूरत है.'

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