
पाकिस्तान का ATM नहीं है अमेरिका, जीत गई तो... भारतवंशी निक्की हेली का फूटा गुस्सा
AajTak
संयुक्त राष्ट्र में राजदूत रह चुकीं हेली ने कहा कि कमजोर अमेरिका ही बुरे लोगों की आर्थिक मदद करता है. अमेरिका ने पिछले साल पाकिस्तान, इराक और जिम्बाब्वे को लाखों डॉलर दिए. सशक्त अमेरिका दुनियाभर के देशों का एटीएम नहीं होगा. अमेरिका दुनिया का एटीएम नहीं बन सकता. राष्ट्रपति के रूप में हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारी विदेश नीति दुरुस्त हो. हमारी योजनाओं को हमारे दुश्मनों को पैसे भेजना नहीं होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से दावेदार भारतीय मूल की निक्की हेली ने पाकिस्तान पर दो टूक निशाना साधते हुए कहा है कि अगर मैं सत्ता में आई तो पाकिस्तान जैसे इन बुरे देशों को हम लाखों डॉलर नहीं देंगे.
संयुक्त राष्ट्र में राजदूत रह चुकीं हेली ने कहा कि कमजोर अमेरिका ही बुरे लोगों की आर्थिक मदद करता है. अमेरिका ने पिछले साल पाकिस्तान, इराक और जिम्बाब्वे को लाखों डॉलर दिए. सशक्त अमेरिका दुनियाभर के देशों का एटीएम नहीं होगा.
हेली ने ट्वीट कर कहा कि अमेरिका दुनिया का एटीएम नहीं बन सकता. राष्ट्रपति के रूप में हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारी विदेश नीति दुरुस्त हो. हमारी योजनाएं हमारे दुश्मनों को पैसे भेजने से जुड़ी हुई नहीं होगी.
साउथ कैरोलिना से दो बार गवर्नर चुनी गईं हेली ने कहा कि हम उन देशों को दिए जाने वाली पाई-पाई रोक देंगे, जो हमसे नफरत करते हैं. सशक्त अमेरिका बुरे लोगों को पैसे नहीं देता. गौरवान्वित अमेरिका हमारे लोगों की खून पैसे की कमाई को यूं बर्बाद नहीं करता. सिर्फ वही नेता हमारा विश्वास जीत सकते हैं, जो हमारे दुश्मनों के खिलाफ खड़े हों और दोस्तों के साथ खड़े हों.
हेली ने कहा कि अमेरिका ने विदेशी सहायता के तौर पर पिछले साल 46 अरब डॉलर खर्च किए, जो चीन, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों को दिए गए. अमेरिका टैक्सपेयर जानना चाहते हैं कि हमारा पैसा कहां जा रहा है और उसका क्या किया जा रहा है.
निक्की हेली ने कहा कि बाइडेन सरकार ने पाकिस्तान के लिए सैन्य सहायता फिर बहाल की जबकि पाकिस्तान दर्जनभर से अधिक आतंकवादी संगठनों को पनाह दिए है. हेली ने कहा कि जब वह संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत थीं, उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की तकरीबन दो अरब डॉलर की सैन्य सहायता में कटौती की थी. निक्की ने इस फैसले का समर्थन किया था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान उन आतंकियों का समर्थन करता था, जो अमेरिकी सैनिकों की मौत का कारण बने.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











