
'पति कौन-पत्नी कौन...बच्चे की कस्टडी किसे', सेम सेक्स मैरिज के पक्ष-विपक्ष में SC में रखी गईं ये 10 दलीलें
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सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश तुषार मेहता ने कहा, ''मौजूदा कानून में पत्नी गुजारा भत्ता मांग सकती है, लेकिन समलैंगिक शादियों में क्या होगा? इस पर जस्टिस कोहली ने कहा, हमारे पास याचिकाएं आती हैं कि पति भी भरण-पोषण का दावा कर सकता है. इस पर तुषार मेहता ने कहा, कपल कोर्ट को कैसे बताएगा कि पत्नी कौन है? यह कैसे स्पष्ट होगा?''
समलैंगिक शादियों को मंजूरी देने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन याचिकाकर्ताओं की दलीलों का जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि समलैंगिक शादियों को मान्यता देने के मामले में व्यवहारिक और कानूनी समेत तमाम अड़चन हैं. इतना ही नहीं उन्होंने याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए पति और पत्नी की जगह जीवनसाथी यानी स्पाउस शब्द के इस्तेमाल वाले सुझाव का भी विरोध किया. इस दौरान उन्होंने तलाक, घरेलू हिंसा, भरण पोषण प्रावधानों में आने वाली अड़चनों का भी जिक्र किया. आइए जानते हैं कि सेम सेक्स मैरिज के पक्ष-विपक्ष में SC में किसने क्या कहा?
1- पति कौन, पत्नी कौन...ये कोर्ट में कैसे स्पष्ट होगा? सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ''आपका कहना है कि पति या पत्नी के लिए जीवनसाथी (स्पाउस) शब्द का इस्तेमाल करने से कोई फायदा नहीं होगा.'' दरअसल, समलैंगिक शादियों की मांग को लेकर याचिकाएं दाखिल करने वालों की ओर पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था, कानूनी अड़चनों के मद्देनजर कानून में पति और पत्नी की जगह जीवनसाथी यानी स्पाउस शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 14 के मुताबिक समानता के अधिकार की भी रक्षा होती रहेगी.
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''तलाक से संबंधित अनुभाग को देखें, क्या इस विशेष वर्ग में तलाक का कानून भी सभी लोगों के लिए एक बन सकता है? ट्रांस मैरिज में कौन पत्नी होगा, गे मैरिज में कौन पत्नी होगा? इसका दूरगामी प्रभाव होगा. यह देश भर में बहुत से लोगों को प्रभावित करता है.''
तुषार मेहता ने कहा, ''मौजूदा कानून में पत्नी गुजारा भत्ता मांग सकती है, लेकिन समलैंगिक शादियों में क्या होगा? इस पर जस्टिस कोहली ने कहा, लेकिन यह दूसरे पर भी लागू होता है. हमारे पास याचिकाएं आती हैं कि पति भी भरण-पोषण का दावा कर सकता है. इस पर तुषार मेहता ने कहा, कपल कोर्ट को कैसे बताएगा कि पत्नी कौन है? यह कैसे स्पष्ट होगा?''
2- मैरिज रजिस्ट्रेशन पर हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''शादी का रजिस्ट्रेशन कभी अनिवार्य नहीं रहा.'' वहीं, इस पर सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं कराने से विवाह शून्य नहीं होता. अगर मैं गलत हूं, तो बताएं. वहीं, इस पर मेहता ने कहा, हममें से कई लोगों ने अपनी शादी का पंजीकरण नहीं कराया है, क्योंकि विवाह अधिनियम के तहत यह अनिवार्य नहीं है. इस पर जस्टिस भट्ट ने कहा, तमिलनाडु में इसे अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं, सीजेआई ने कहा, वीजा के लिए शादी के रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है.

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