
पंजाब में फेक आर्म्स लाइसेंस रैकेट का भंडाफोड़, पुलिस ने 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार
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पंजाब पुलिस ने फेक आर्म्स लाइसेंस बनाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस गैंग के 2 सदस्यों सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह रैकेट तरनतारन सेवा केंद्र पर जिला प्रबंधक सूरज भंडारी के इशारे पर चल रहा था, जो प्रति ग्राहक 1.5 लाख रुपए वसूल रहा था.
पंजाब पुलिस ने फेक आर्म्स लाइसेंस बनाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस गैंग के 2 सदस्यों सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह रैकेट तरनतारन सेवा केंद्र पर जिला प्रबंधक सूरज भंडारी के इशारे पर चल रहा था, जो प्रति ग्राहक 1.5 लाख रुपए वसूल रहा था.
पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि इस गैंग का सरगना सूरज भंडारी फरार है. गिरफ्तार आरोपियों में छह फर्जी हथियार लाइसेंस धारक शामिल हैं. इस गैंग के सदस्यों में तरनतारन सेवा केंद्र का एक कर्मचारी हरपाल सिंह और फोटोकॉपी दुकान का मालिक बलजीत सिंह शामिल है.
इन लोगों ने फर्जी हथियार लाइसेंस तैयार करने के लिए आधार कार्ड और लाइसेंस प्रोफॉर्मा सहित आवश्यक पहचान प्रमाणों में छेड़छाड़ करने के पीछे अपनी भूमिका की बात स्वीकार कर ली है. पुलिस ने एक लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसमें ऑनलाइन ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का विवरण है.
9 अप्रैल को हत्या के प्रयास के मामले में अनगढ़ के बबलू उर्फ बल्लू की गिरफ्तारी के बाद इस रैकेट का पर्दाफाश हुआ था. उसने पूछताछ के दौरान सह-आरोपी कंवरदीप सिंह के साथ फर्जी लाइसेंसी हथियार रखने की बात कबूल की थी. इस खुलासे के बाद पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की थी.
इस जांच में पाया गया कि लाइसेंस का सत्यापन डिप्टी कमिश्नर ऑफिस तरनतारन से किया गया था, लेकिन ऑफिशियल रिकॉर्ड में इसका उल्लेख नहीं था. उन्होंने कहा कि यह भी पता चला कि प्रतिकूल रिकॉर्ड वाले अपराधी फर्जी लाइसेंस बनाने के लिए तरनतारन की सुविधाओं का उपयोग कर रहे थे.
डीजीपी ने इस मामले में गन हाउसों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया है. उन्होंने कहा कि पुलिस टीम चिन्हित गन हाउसों की भूमिका की जांच कर रही हैं, जिन्हें लाइसेंस के फर्जी होने की जानकारी है, जो ऑनलाइन सत्यापन किए बिना हथियार बेच रहे हैं. इस संबंध में 11 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी.

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