
नोएडा, यमुना नगर, सीहोर... ऑपरेशन सरकार-II में नदियों का सीना चीरकर अवैध खनन करने वाले बेनकाब
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ऑपरेशन सरकार-II के तहत आजतक की अंडरकवर जांच में उत्तर प्रदेश के नोएडा से लेकर हरियाणा और मध्यप्रदेश तक नदियों में चल रहे अवैध खनन के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है. यमुना और नर्मदा नदियों में पट्टे की आड़ में नियमों को ताक पर रखकर जेसीबी, पोकलेन और भारी मशीनों से दिन-रात खनन किया जा रहा है, नदी की धारा मोड़ी जा रही है और डंपरों के लिए रास्ते बनाए गए हैं.
ऑपरेशन सरकार-II के तहत उत्तर प्रदेश के नोएडा में अवैध खनन के सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए आजतक के अंडरकवर रिपोर्टर नोएडा के रायपुर इलाके में पहुंचे. जिला प्रशासन का दावा यही है कि नोएडा में अवैध खनन नाम की कोई चीज नही हैं. नोएडा में खनन माफियाओं पर चुन-चुन कर शिंकजा कसा जा चुका हैं यानी नोएडा खनन माफियाओं से मुक्त है. लेकिन आजतक के खुफिया कैमरे में जिला प्रशासन के दावों की कलई खुल गई. आजतक के स्टिंग ऑपरेशन में खनन माफिया से लेकर अवैध खनन को संरक्षण देने वाले सरकारी मुलाजिम की सच्चाई कैद हो गई.
यमुना नदी के बीचों-बीच पट्टे की आड़ में जेसीबी और भारी मशीनों से अवैध खनन का खेल जारी है. अवैध खनन के लिए यमुना की धारा को मोड़ दिया गया है. नदी के बीचों-बीच डंपरों से बालू की ढुलाई के लिए अस्थाई मार्ग का निर्माण किया गया. यमुना नदी में तीन मीटर से ज्यादा या फिर पानी आने तक ही खनन हो सकता है, लेकिन यहां कायदे-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. यानी यमुना नदी का सीना चीरकर, पर्यावरण को ताक पर रखकर, सरकार के राजस्व में जिला प्रशासन की शह पर बंदरबाट का खेल बदस्तूर जारी है.
यमुना नदी को खोखला करने का लाइसेंस किसने दिया?
आखिर खनन के नाम पर यमुना नदी के साथ खुल्लम-खुल्ला खिलवाड़ की छूट किसने दी. फोन पर जिले के खनन अधिकारी ने कैमरे में कैद सच्चाई को झुठलाने की कोशिश की. उन्होंने साइट पर चले रहे अवैध खनन का वीडियो मांगा. रिपोर्टर ने वीडियो भेजने के बजाय खनन अधिकारी को वीडियो कॉल के जरिए सच्चाई दिखाने का फैसला किया. जिला खनन अधिकारी का काम है अवैध खनन पर कार्रवाई करना लेकिन जिम्मेदार अफसर ऐसे पेश आए मानों उनकी जानकारी में कुछ भी नहीं है. जैसे ही खनन अफसर का फोन कटा, चंद सेकेंड के बाद आजतक के अंडरकवर रिपोर्टर के मोबाइल पर अननोन नंबर से फोन आया. ये फोन खनन का पट्टा लेनी वाली कंपनी की तरफ से आया. फोन करने वाले ने अपना नाम मचल सिंह बताया. रिपोर्टर ने मिलने की इच्छा जाहिर की. चंद मिनटों में मचल सिंह सफेद रंग की स्कॉपियो, जिसका नंबर है-UP16 CS 9720 से हमारे दफ्तर पहुंच गया.
जैसे ही बातचीत शुरू हुई अवैध खनन के खेल का सच हमारे कैमरे में कैद हो गया. मचल सिंह का दावा है कि बालाजी इंटरप्राइजेज का काम नोएडा में वही देखता है, लेकिन उसे खनन से जुड़े कायदे कानून नहीं पता है. मतलब मचल सिंह जितना बता रहा था, उससे कहीं ज्यादा छिपा रहा था ताकि अवैध खनन के काले कारोबार पर पर्दा डाल सके. लेकिन हमारे खुफिया कैमरे में मचल सिंह और उसका साथी शुभम यादव बेनकाब हो गए.

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