
नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचण्ड को झटका, ओली की पार्टी का समर्थन वापस लेने का फैसला
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के पी ओली की पार्टी नेपाल कम्यूनिष्ट पार्टी ने प्रधानमंत्री प्रचण्ड की तरफ से मंत्रियों को परेशान करने का हवाला देते हुए पुष्प कमल दाहाल प्रचण्ड वाली सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा की है. हालांकि, प्रचण्ड सरकार अभी भी बहुमत में है और सरकार को कोई खतरा नहीं है.
नेपाल का सत्तारूढ़ गठबन्धन अंततः सोमवार को औपचारिक रूप से विभाजित हो गया. प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचण्ड सरकार के सबसे बडे़ सहयोगी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) ने सरकार से अपने मंत्रियों को वापस बुलाते हुए सरकार को दिए अपने समर्थन को वापस ले लिया है.
सोमवार सुबह हुई यूएमएल पार्टी की सचिवालय बैठक में आलाकमान ने पुष्प कमल दहल के नेतृत्व वाली गठबंधन से बाहर निकलने और सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया. पार्टी द्वारा यह निर्णय राष्ट्रपति चुनाव के लिए बदले हुए राजनीतिक समीकरण के मद्देनजर लिया गया है.
प्रधानमंत्री की ओर से विदेश मामलों के मंत्री विमला राय पौड्याल को जिनेवा यात्रा रद्द करने की निर्देश से नाराज यूएमएल ने पार्टी सचिवालय की बैठक बुलाई थी. इससे पहले यूएमएल ने गठबंधन छोड़ने और रहने के फैसले को राष्ट्रपति चुनाव पर छोड़ दिया था. 9 मार्च को नेपाल में राष्ट्रपति चुनाव होंगे. यूएमएल देखना चाहती थी कि प्रचण्ड राष्ट्रपति चुनाव में किस पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन करते हैं.
पार्टी के वाइस-चेयरमैन बिष्णु पौडेल ने कहा कि प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल के काम करने के अलग तरीके को देखते हुए पार्टी ने गठबंधन छोड़ने का फैसला किया है. पत्रकारों से बातचीत करते हुए पौडेल ने कहा कि बिना मंत्रालय के मंत्री के रूप में सरकार में रहना हमें उचित नहीं लगा.
दरअसल, प्रधानमंत्री दाहाल ने यूएमएल पार्टी से विदेश मंत्री को अपनी विदेश दौरा रद्द करने का निर्देश दिया था और स्वेच्छा से सरकार से बाहर जाने या बिना पोर्टफोलियो के मंत्री के रूप में काम करने के लिए कहा था.
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