
निशांत कुमार के सिर कांटों भरा ताज, क्या वे ‘नवीन पटनायक‘ बन पाएंगे?
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निशांत कुमार ने जेडीयू में शामिल होकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है. खबर तो यही है कि निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है - लेकिन जिन हालात में निशांत कुमार ने कदम बढ़ाया है, कदम कदम पर काबिलियत का सबूत पेश करना होगा.
निशांत कुमार अपने पिता नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल होते वक्त भी बेहद शांत नजर आए. नए काम का उत्साह अंदर भले रहा हो, चेहरे या हाव-भाव से तो नजर नहीं आया. कुछ लोग आंसू की तरह अपनी फीलिंग भी छुपा लेते हैं, हो सकता है निशांत के भी ऐसे ही प्रयास रहे हों.
अभी तो शुरुआत है. निशांत कुमार को आगे बड़ी जिम्मेदारियां मिलने की बातें हो रही हैं. पार्टी और परिवार के करीब लोग तो निशांत को शांत और बेहद गंभीर बता रहे हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी काबिलियत पर वैसे ही शक जता रहे हैं, जैसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर होते हैं.
निशांत कुमार मेहनत करने और अपने पिता के 20 साल में किए काम को आगे बढ़ाने की बात भी कर रहे हैं, फिर भी सवाल है - क्या तमाम सहयोगियों और सलाहकारों की बदौलत निशांत कुमार भविष्य में मिलने वाली जिम्मेदारियों को संभाल पाएंगे? सच तो यही है कि ऐसे हर सवाल का जवाब तो वक्त ही दे सकता है.
काम बोलता है, तो विरोधी खामोश हो जाते हैं
कुल 15 मिनट के कार्यक्रम में निशांत कुमार के 2 मिनट का संबोधन भी शामिल रहा, और अपनी तरफ से वे सारी बातें बोल दीं जो जरूरी लगी होंगी. मंच पर भी उनका संकोच साफ साफ दिखा, वह बार-बार आगे की तरफ झुक जा रहे थे. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने निशांत कुमार को जेडीयू की सदस्यता की पर्ची थमाई, और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने जेडीयू का पट्टा पहनाया. बस उसी वक्त निशांत कुमार ने तत्परता दिखाई, झुके और ललन सिंह के पांव छू लिए - तालियां बजीं, पुराना अध्याय समाप्त और नया आरंभ हुआ.
मीडिया के जरिए निशांत कुमार के बारे में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. कुछ लोग उनके राजनीति में सफल होने पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन जेडीयू कार्यकर्ता निशांत को नए रोल में पाकर शांत हो गए हैं. जो विरोध नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन के लिए जाते वक्त देखने को मिली था, वैसा तो कहीं नहीं ही नजर आ रहा है.

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