
नरवणे की किताब ‘Four Stars of Destiny’ क्यों अप्रकाशित रह गई, राहुल गांधी की सुई उसी पर क्यों अटकी?
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लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को बहस तो राष्ट्रपति के अभिभाषण पर होने थी, लेकिन राहुल गांधी ने जब पूर्व सेना अध्यक्ष मनोज नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र किया तो माहौल जंग की तरह हो गया. गलवान घाटी संघर्ष से जुड़ी जानकारियों को लेकर कांग्रेस हमलावर है. भाजपा के अपने पलटवार हैं. दिलचस्प है इस विवाद को नियमों के दायरे में देखना.
संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में अचानक ऐसा हंगामा खड़ा हो गया, जिसने एक अप्रकाशित किताब को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया. यह किताब किसी राजनेता की नहीं, बल्कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की है. राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब का हवाला दिए जाने पर सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया और स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा. सवाल उठने लगे कि आखिर यह किताब प्रकाशित क्यों नहीं हो सकी और उस पर चर्चा करना नियमों का उल्लंघन कैसे हो गया.
नरवणे की किताब क्या है और इसमें क्या लिखा है?
जनरल नरवणे की किताब का नाम ‘Four Stars of Destiny’ है. जिसमें उन्होंने अपने संस्मरण लिख हैं. सैन्य जीवन के अनुभवों के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव, पूर्वी लद्दाख में हुए मिलिट्री एक्शंस, सरकार और सेना के बीच डिसीजन मेकिंग प्रोसेस और रणनीतिक सोच का जिक्र है. दिसंबर 2023 में इसके कुछ अंश मीडिया में प्रकाशित हुए थे, जिनमें यह संकेत मिला कि चीन के साथ टकराव के दौरान हालात उतने नियंत्रण में' नहीं थे, जितना आधिकारिक तौर पर बताया गया. यही अंश इस किताब को संवेदनशील बना देते हैं, क्योंकि वे सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक निर्णयों से जुड़े माने गए.
किताब अब तक प्रकाशित क्यों नहीं हो पाई? क्या कहते हैं नियम-प्रावधान
(A) Army Rules, 1954 के Section 21 के तहत सेना से जुड़े विषयों (service subject) या सुरक्षा मामलों पर कोई सामग्री प्रकाशित नहीं की जा सकती. कोई भी सेना-संबंधी जानकारी प्रेस को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में बताई या प्रकाशित नहीं हो सकती. बिना केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के ऐसी कोई भी किताब या लेख प्रकाशित नहीं हो सकता. यहां ‘service information‘ में वे बातें आती हैं जो सशस्त्र बलों की रणनीति, नीति, संचालन या सेना और सरकार के बीच निर्णय प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारी हो. ये सब सेना नियमों के तहत आते हैं.
(B) Retired कर्मचारियों पर नियम- Army Rules खुलकर यह नहीं बताते कि सेवानिवृत्त अधिकारी कैसे प्रकाशित कर सकते हैं, पर भारतीय सरकार के कुछ नियम (जैसे Central Civil Services Pension Rules, 1972 में बदलाव) यह कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति सुरक्षा/इंटेलिजेंस/सुरक्षा-सम्बंधित जानकारी प्रकाशित करना चाहता है, तो उसे पूर्व अनुमति लेनी चाहिए. खासकर ऐसे मामलों में जहां न केवल व्यक्तिगत अनुभव, बल्कि देश की रक्षा नीति या निर्णय प्रक्रियाएं शामिल हों.

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