
धोखा, निराशा और देश से पलायन... सीरिया में कुछ ऐसे बीते थे बशर अल-असद के आखिरी घंटे
AajTak
असद ने अपने छोटे भाई महेर, जो सेना की एलीट 4th आर्मर्ड डिवीजन के कमांडर थे, को भी अपनी योजना के बारे में नहीं बताया. तीन सहयोगियों के अनुसार, महेर ने हेलीकॉप्टर से इराक और फिर रूस का रुख किया. असद के मामा के बेटे एहाब और इयाद मखलूफ को भी दमिश्क से भागते समय पीछे छोड़ दिया गया.
सीरिया के राष्ट्रपति रहे बशर अल-असद की सत्ता का तख्तापलट हुए लगभग हफ्ते भर बीत चुके हैं.असद को देश छोड़कर भागना पड़ा. इस दौरान उनके प्लेन के क्रैश होने जैसी अफवाह भरी खबरें भी सामने आईं, हालांकि अगले दिन तक यह स्पष्ट हो गया कि वह सुरक्षित हैं और देश छोड़कर निकल चुके हैं. अब उनकी पहचान रूस के शरणार्थी के तौर पर है और इस तरह सीरिया में असद परिवार के 50 साल के तानाशाही शासन का खात्मा हुआ.
पलायन की योजना की किसी को जानकारी नहीं हालांकि असद को लेकर सवाल अभी भी बाकी हैं. सबसे बड़ा सवाल ये कि, उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कब लिया. किसने उन्हें सलाह दी, वह कैसे और कब निकली और इस पूरे एग्जिट प्लान की रूपरेखा कब तैयार हुई. इसे लेकर सामने आया है कि, बशर अल-असद ने सीरिया छोड़ने की अपनी योजना के बारे में लगभग किसी को नहीं बताया था. एक तरफ जब उनके शासन की नींव ढह रही थी, तो उन्होंने सहयोगियों, अधिकारियों और यहां तक कि रिश्तेदारों को भी इससे अंधेरे में रखा. सीरिया में जो कुछ घटा, इसके बारे में जानकारी रखने वाले 12 से अधिक लोगों ने रॉयटर्स से बातचीत में यह बातें सामने रखीं.
असद को थी रूसी सैन्य सहायता की आस मॉस्को भागने से कुछ घंटे पहले, असद ने शनिवार को रक्षा मंत्रालय में लगभग 30 सेना और सुरक्षा प्रमुखों की एक बैठक में भरोसा दिलाया कि रूसी सैन्य सहायता जल्द ही पहुंचेगी. उन्होंने ज़मीन पर तैनात बलों से मोर्चा संभालने का आग्रह किया. इस बैठक में शामिल एक कमांडर ने यह जानकारी दी, लेकिन नाम न बताने की शर्त पर. एक करीबी सहयोगी ने बताया कि असद ने शनिवार को अपने प्रेसिडेंशियल ऑफिस मैनेजर से कहा कि काम खत्म करने के बाद वह घर जा रहे हैं, लेकिन इसके बजाय वे एयरपोर्ट चले गए थे.
अपने समर्थकों को उनके हाल पर छोड़ गए अशद उन्होंने अपनी मीडिया सलाहकार बुशैना शाबान को भी फोन किया और उन्हें भाषण तैयार करने के लिए अपने घर बुलाया. लेकिन जब वह पहुंचीं, तो घर खाली था. "असद ने आखिरी लड़ाई भी नहीं लड़ी. उन्होंने अपने सैनिकों को संगठित करने की कोशिश तक नहीं की," अरब रिफॉर्म इनिशिएटिव के निदेशक नदीम हौरी ने कहा. "उन्होंने अपने समर्थकों को उनके हाल पर छोड़ दिया."
14 लोगों से हुई बातचीत समाचार एजेंसी असद से मॉस्को में संपर्क नहीं कर सकी है, जहां उन्हें राजनीतिक शरण दी गई है. उनकी सत्ता के अंतिम दिनों और घंटों को करीब से जानने वाले 14 लोगों से हुई बातचीत एक ऐसे नेता की तस्वीर पेश करती है, जिसने अपनी 24 साल की हुकूमत बचाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धोखा और गुप्त योजनाओं का सहारा लिया. इन सूत्रों में पूर्व राष्ट्रपति के करीबी सहयोगी, क्षेत्रीय राजनयिक, सुरक्षा अधिकारी और वरिष्ठ ईरानी अधिकारी शामिल हैं. इन ज्यादातर सूत्रों ने संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए अपना नाम गोपनीय रखने का अनुरोध किया.
असद के छोटे भाई को भी नहीं थी पलायन की खबर असद ने अपने छोटे भाई महेर, जो सेना की एलीट 4th आर्मर्ड डिवीजन के कमांडर थे, को भी अपनी योजना के बारे में नहीं बताया. तीन सहयोगियों के अनुसार, महेर ने हेलीकॉप्टर से इराक और फिर रूस का रुख किया. असद के मामा के बेटे एहाब और इयाद मखलूफ को भी दमिश्क से भागते समय पीछे छोड़ दिया गया. एक सीरियाई सहयोगी और एक लेबनानी सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि दोनों कार से लेबनान भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रास्ते में विद्रोहियों के हमले का शिकार हो गए. एहाब मारे गए और इयाद घायल हुए. हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी, और समाचार एजेंसी इसे सत्यापित नहीं करती.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?








