
धोखाधड़ी से सैकड़ों भारतीयों को दिलवाया अमेरिकी वीजा, गिरफ्तार हुआ भारतीय मूल का कारोबारी
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अमेरिका में एक भारतीय मूल के व्यक्ति ने वीजा धोखाधड़ी का जाल फैला रखा था जिसमें कई अमेरिकी पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. व्यक्ति कारोबारी था जो भारतीयों को वीजा दिलाने के लिए अमेरिकी वीजा नियम के एक प्रावधान का इस्तेमाल करता था. इसके तहत वो वीजा का दावा करने वाले लोगों को अपराध पीड़ित बताता था.
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने भारतीय मूल के एक सबवे रेस्तरां मालिक को बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है. चंद्रकांत मलिक नाम के कारोबारी पर आरोप है कि उसने पुलिस को फर्जी पुलिस रिपोर्ट बनाने के लिए के लिए 5,000 डॉलर देकर सैकड़ों भारतीयों को अवैध रूप से वीजा दिलाने में मदद की.
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि चंद्रकांत 'लाला' पटेल ने अमेरिका के लुइसियाना राज्य के तीन शहरों में पुलिस को पैसे दिए जिसके बाद धोखाधड़ी से लेकर सशस्त्र डकैती के मामले बनाए गए और फिर उन लोगों को पीड़ित के रूप में पेश कर उनके लिए वीजा का दावा किया गया.
अमेरिकी वीजा कानून में एक प्रावधान है जिसके तहत अपराध पीड़ितों को वीजा दिया जा सकता है. इस तरह के वीजा को 'यू वीजा' कहा जाता है. इसी प्रावधान के जरिए कारोबारी ने सैकड़ों भारतीयों को अवैध रूप से वीजा दिलाने में मदद की.
लुइसियाना के लाफायेट में संघीय ग्रैंड जूरी ने पटेल, एक मार्शल, अलेक्जेंडर वान हुक सहित कई अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और षड्यंत्र के आरोप तय किए. अमेरिका के कानूनी सिस्टम में, ग्रैंड जूरी नागरिकों से बना एक पैनल है जो यह तय करता है कि करता है कि क्या प्रथम दृष्टया आरोप लगाने का कोई मामला बनता है या नहीं.
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, पटेल ने खुद को भी किसी अपराध का पीड़ित बताकर वीजा हासिल किया था और फिर वो इसी टेक्निक के जरिए दूसरे भारतीयों को भी गैर-कानूनी तरीके से वीजा दिलवाने लगा. वो प्रत्येक व्यक्ति के लिए पुलिस अधिकारियों को 5,000 डॉलर देता था ताकि पुलिस अपराध का झूठा ब्योरा देकर व्यक्ति को पीड़ित दिखा सके. और इसी आधार पर वो अमेरिकी वीजा का दावा कर सके.
डॉक्यूमेंट्स में 25 लोगों की सूची दी गई है, जिनका अंतिम नाम पटेल है. आरोपों में कहा गया है कि पटेल और पुलिस अधिकारी जानते थे कि पीड़ित होकर वीजा का दावा करने वाले लोग किसी भी अपराध का शिकार नहीं थे.

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