
धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में अमेरिका में भारत को लेकर उठा सवाल
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अमेरिका ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव को लेकर भारत पर निशाना साधा है. अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए भारतीय मूल के अमेरिकी राजदूत रशद हुसैन ने भारत की हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं पर अमेरिकी अधिकारी भारतीय अधिकारियों के संपर्क में हैं.
अमेरिका ने एक बार फिर भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है. अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (International Religious Freedom, IRF) के लिए भारतीय मूल के अमेरिकी राजदूत रशद हुसैन ने IRF के वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए अल्पसंख्यकों, हिजाब बैन, घरों को बुलडोजर से गिराए जाने, नागरिकता कानून आदि मुद्दों पर भारत को घेरा है. रशद ने कहा कि इन सब मुद्दों को लेकर अमेरिकी अधिकारी भारत के संपर्क में रहे हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को IRF के वार्षिक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए हुसैन ने बताया कि उनके पिता 1969 में भारत से अमेरिका आए थे और वह अब भी भारत में होने वाली घटनाओं पर नजर रखते हैं.
उन्होंने कहा, 'इस देश ने (अमेरिका ने) उन्हें सब कुछ दिया लेकिन वो भारत से प्यार करते हैं और वहां होने वाली प्रतिदिन की घटनाओं पर बारीकी से नजर रखते हैं. मेरे माता-पिता और मैं वहां होने वाली घटनाओं पर बात करते हैं, जैसा कि आप लोग वहां की घटनाओं को लेकर हमारे पास आते हैं. आप सब देख रहे हैं कि भारत में क्या हो रहा है. हम सब भारत से प्यार करते हैं और चाहते हैं कि वो अपने मूल्यों पर जिए.'
हुसैन ने आगे कहा कि अमेरिका भारत में कई धर्म के लोगों को लेकर चिंतित है और धार्मिक अल्पसंख्यकों की चुनौतियों के समाधान को लेकर भारतीय अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है.
उन्होंने सम्मेलन के दौरान कहा, 'भारत ने अब एक नागरिकता कानून बना लिया है जिसका जिक्र किताबों में भी है. हमें भारत में नरसंहार के खुले आह्वान सुनने के मिलते हैं. हम चर्चों पर हमले की खबरें सुन रहे हैं, हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, घरों को तोड़ने की खबरें आ रही हैं.'
गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी का भी जिक्र

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