
'...दोबारा मुख्यमंत्री भी बन गए', PM मोदी ने CM योगी को लेकर हैदराबाद में क्यों कही ये बात
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PM Modi ने हैदराबाद में हुई एक रैली में तेलंगाना के सीएम केसीआर पर निशाना साधते हुए CM Yogi की जमकर तारीफ की है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में बीजेपी कार्यकर्ताओं की एक रैली को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की है. उन्होंने तेलंगाना के सीएम के.चंद्रशेखर राव को 'अंधविश्वासी' बताते हुए कहा कि नोएडा के सीएम योगी आदित्यनाथ संत हैं. लेकिन जब उनके सामने एक शहर में न जाने की बात आई, क्योंकि इससे कुर्सी जाने का खतरा है, तो उन्होंने कहा कि वो विज्ञान पर विश्वास करते हैं. वो शहर भी गए और दोबारा मुख्यमंत्री भी बन गए.
बता दें कि पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के शहर नोएडा के बारे में जिक्र कर रहे थे जिसके बारे में कहा जाता रहा है कि जो भी सीएम यहां आता है उसकी कुर्सी चली जाती. कई वर्षों तक नोएडा के लोग यूपी के मुख्यमंत्रियों का आने का इंतजार करते रहे. लेकिन इस मिथक को योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा और अपने पहले कार्यकाल में ही वो कई बार नोएडा पहुंचे.
हैदराबाद की रैली में पीएम मोदी ने सीएम योगी की इस बात का जिक्र करते हुए तेलंगाने के सीएम पर इशारों-इशारों में निशाना साधा और कहा कि 21वीं सदी में भी जो लोग अंधविश्वास के गुलाम बने हुए हैं वो किसी भी का नुकसान कर सकते हैं. ये अंधविश्वासी लोग तेलंगाना के साथ कभी न्याय नहीं कर सकते हैं.
पीएम मोदी ने कहा, 'जब मैं गुजरात में सीएम था तो भी वहां भी कुछ शहरों के नाम के साथ अंधविश्वास जुड़ा था कि जो जाएगा उसकी कुर्सी चली जाएगी. मैं डंके की चोट के साथ-साथ वहां बार-बार जाता था. मैं विज्ञान और टेक्नॉलजी पर विश्वास करता हूं.'
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'मैं तो आज तेलंगाना की धरती से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी को भी बधाई देता हूं. वो तो संत और संन्यासी परंपरा से हैं. जब उनके सामने आया कि उस (नोएडा) शहर में नहीं जाना चाहिए तो योगी जी ने कहा कि मैं विज्ञान में विश्वास करता हूं और वो चले गए और दोबारा मुख्यमंत्री भी बन गए' पीएम मोदी ने कहा कि अंधविश्वास के तवज्जो देने वाले लोग उसके भविष्य को कभी संवार नहीं सकते हैं. ऐसे अंधविश्वासी लोगों से हमें तेलंगाना को बचाना है.
पीएम मोदी ने आगे कहा कि दशकों तक चले तेलंगाना आंदोलन में हजारों लोगों ने अपना बलिदान दिया था. ये बलिदान तेलंगाना के भविष्य़ के लिए था. ये बलिदान, तेलंगाना की आन-बान-शान के लिए था. तेलंगाना आंदोलन इसलिए नहीं चला था कि कोई एक परिवार तेलंगाना के विकास के सपनों को लगातार कुचलता रहे. परिवारवाद की वजह से देश के युवाओं को, देश की प्रतिभाओं को राजनीति में आने का अवसर भी नहीं मिलता. परिवारवाद उनके हर सपनों को कुचलता है, उनके लिए हर दरवाजा बंद करता है. इसलिए, आज 21वीं सदी के भारत के लिए परिवारवाद से मुक्ति, परिवारवादी पार्टियों से मुक्ति एक संकल्प भी है.

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